Monday, 27 July 2026

लोक परीक्षा संशोधन बिल पर नहीं हो सकी चर्चा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद मंगलवार को बहस पर सहमति


लोक परीक्षा संशोधन बिल पर नहीं हो सकी चर्चा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद मंगलवार को बहस पर सहमति

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छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष, हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित, छह घंटे की चर्चा के लिए समय निर्धारित

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण पहले दिन विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोपहर में विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच विधेयक सदन में प्रस्तुत किया।

विपक्षी दल नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पहले उठाने की मांग पर अड़े रहे। कांग्रेस ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें। विपक्षी सांसदों के वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर बार-बार स्थगित हुई।

शाम 5 बजे भी शुरू नहीं हो सकी बहस

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष को अपने मतभेद दूर करने के लिए समय दिया था और शाम 5 बजे विधेयक पर चर्चा शुरू कराने का प्रयास किया। सदन दोबारा बैठने पर भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही, जिसके बाद कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।

स्पीकर ने कहा कि यह विधेयक करोड़ों विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को सहमति बनाकर सार्थक चर्चा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने विधेयक पर विस्तृत बहस के लिए छह घंटे का समय आवंटित किए जाने की जानकारी भी दी।

विपक्ष की मांग—पहले गृह मंत्री जवाब दें

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि वे पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन विधेयक पर चर्चा से पहले छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर गृह मंत्री का बयान आवश्यक है।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल सहित विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोप न्यायिक और प्रशासनिक परीक्षण के अधीन हैं तथा उनका अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद होगा।

विपक्ष के कुछ सदस्यों ने विधेयक को संसदीय स्थायी समिति अथवा संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग भी की, ताकि इसके दंडात्मक और प्रक्रियात्मक प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की जा सके।

स्पीकर ने विपक्षी नेताओं से किया संवाद

सदन में गतिरोध दूर करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष के फ्लोर लीडर्स से बातचीत की। संवाद के बाद प्रमुख राजनीतिक दल मंगलवार को विधेयक पर व्यापक चर्चा कराने के लिए सहमत हो गए। चर्चा के दौरान विभिन्न दल अपने संशोधन और सुझाव रख सकेंगे, जिसके बाद सरकार उत्तर देगी और विधेयक को मतदान के लिए रखा जा सकता है।

मीडिया रिपोर्टों में मंगलवार दोपहर के आसपास चर्चा शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, बहस का अंतिम समय लोकसभा की आधिकारिक कार्यसूची और सदन की उस समय की स्थिति पर निर्भर करेगा।

सरकार बोली—विपक्ष नहीं आया तो भी आगे बढ़ाएंगे बिल

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार विधेयक पर विस्तृत चर्चा चाहती है और सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के भी कई सदस्य बोलने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष चर्चा में भाग नहीं लेता है तो सरकार विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

प्रस्तावित संशोधन विधेयक में संगठित पेपर लीक, परीक्षा माफिया और दोषी सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कठोर दंड, समयबद्ध जांच तथा विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमे चलाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

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