



छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने की नारेबाजी, संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन, इस्तीफे के बाद पहली बार पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का NDA सांसदों ने किया स्वागत
नई दिल्ली। विपक्ष के हंगामे और लगातार नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने से संबंधित ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश कर दिया। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक सदन के पटल पर रखा। हालांकि, हंगामे के कारण विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से वर्ष 2024 के सार्वजनिक परीक्षा कानून को और सख्त बनाया जाएगा। इसमें पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों के दोषियों के लिए कठोर सजा, अधिक जुर्माना, दो महीने में जांच पूरी करने तथा विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में समयबद्ध सुनवाई का प्रावधान प्रस्तावित है।
विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसद नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर 20 जुलाई को हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। विपक्षी सदस्य सरकार से जवाबदेही तय करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माफी की मांग कर रहे थे। हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
इससे पहले सोमवार सुबह 11 बजे दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग का मुद्दा उठाया था। लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा, जिसके बाद दोनों सदनों को 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर भी प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में सांसदों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध किया तथा गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और माफी की मांग की।
विपक्षी दलों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में कामकाज निलंबित करने के नोटिस देकर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने इस्तीफे के बाद सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे। उनके स्वागत के लिए भाजपा और NDA के सांसद मकर द्वार के पास एकत्र हुए। प्रधान के संसद परिसर में पहुंचते ही सांसदों ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगाए और उन्हें संसद भवन के भीतर तक लेकर गए। उन्हें पारंपरिक टोपी भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद और कई सप्ताह तक चले छात्र आंदोलन के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया था।
प्रधान के स्वागत के दौरान संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से समानांतर नारेबाजी देखने को मिली। एक ओर NDA सांसद उनके समर्थन में नारे लगा रहे थे, वहीं दूसरी ओर विपक्षी सांसद शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का विरोध कर रहे थे।
संशोधन विधेयक में व्यक्तिगत अपराधियों के लिए सजा बढ़ाकर न्यूनतम पांच और अधिकतम 10 वर्ष करने तथा अधिकतम जुर्माना ₹50 लाख करने का प्रस्ताव है। संगठित पेपर लीक नेटवर्क के मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की जेल और ₹10 करोड़ तक के न्यूनतम जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
इसके साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने, आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद प्रतिदिन सुनवाई करने और तीन महीने में मुकदमे का निस्तारण करने का प्रावधान भी रखा गया है।
विधेयक पेश होने के बाद अब सरकार इसे चर्चा और पारित कराने के लिए सदन में रखेगी। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून का विरोध नहीं करता, लेकिन छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर अलग से चर्चा की मांग जारी रखेगा।