



प्रदेशाध्यक्ष जमील खान ने राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से की मुलाकात, जिला स्तर पर संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी
जयपुर। सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने राजस्थान के आगामी पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनाव पूरी ताकत से लड़ने का औपचारिक निर्णय लिया है। पार्टी अपने अधिकृत उम्मीदवारों के साथ आवश्यकता के अनुसार समर्थित प्रत्याशियों को भी चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि, सीटों और उम्मीदवारों की अंतिम सूची अभी घोषित नहीं की गई है।
AIMIM राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष जमील अहमद खान ने शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात कर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी स्थानीय चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की।
पार्टी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बैठक में ओवैसी ने राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव मजबूती से लड़ने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। प्रदेश नेतृत्व ने पंचायत राज संस्थाओं के चुनावों में भी संगठनात्मक ताकत के साथ उतरने की तैयारी शुरू कर दी है।
ओवैसी से मुलाकात के बाद जमील खान की अध्यक्षता में प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इसमें जिला एवं स्थानीय स्तर पर संगठन मजबूत करने, चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों से संपर्क करने और संभावित क्षेत्रों की पहचान करने पर विचार किया गया।
पार्टी ने कहा कि वह स्थानीय समस्याओं, नागरिक सुविधाओं, सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को अपने चुनाव अभियान के प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखेगी। प्रदेश स्तर पर जल्द ही सघन जनसंपर्क अभियान शुरू किए जाने की तैयारी है।
AIMIM ने वर्ष 2022 में राजस्थान में अपनी प्रदेश इकाई का विस्तार किया था। इसके बाद पार्टी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में हवा महल, फतेहपुर और कामां सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। अब स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में उतरने का फैसला प्रदेश में जमीनी स्तर पर संगठन का विस्तार करने की उसकी नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्थान में स्थानीय चुनावों का मुकाबला परंपरागत रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित रहा है। AIMIM की सक्रिय भागीदारी से विशेष रूप से मुस्लिम और अल्पसंख्यक मतदाताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति वाले नगर निकायों एवं पंचायत क्षेत्रों में नए चुनावी समीकरण बन सकते हैं।
हालांकि, पार्टी का वास्तविक प्रभाव उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय संगठन, गठबंधन अथवा समर्थित प्रत्याशियों की रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर निर्भर करेगा। इसे कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं में संभावित सेंध के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन चुनावी परिणाम आने से पहले ऐसा कोई निष्कर्ष केवल राजनीतिक आकलन ही माना जाएगा।
राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट को बताया है कि लंबित पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इसके चलते विभिन्न राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक और प्रत्याशी चयन संबंधी तैयारियां तेज कर दी हैं।