



जयपुर। वीजा की वैधता समाप्त होने के बाद भी जयपुर में अनधिकृत रूप से रह रहीं नौ विदेशी महिला नागरिकों को उनके मूल देशों के लिए डिपोर्ट कर दिया गया। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय और एफआरओ-जयपुर शहर की कार्रवाई में दस्तावेजों की जांच के दौरान सभी महिलाएं वीजा ओवरस्टे करती मिलीं।
डिपोर्ट की गई महिलाओं में पांच थाईलैंड की नागरिक हैं। इनके अतिरिक्त युगांडा, तंजानिया, नाइजीरिया और लाओस की एक-एक महिला नागरिक को भी निर्धारित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके मूल देश भेजा गया।
एफआरओ अधिकारी धर्मेन्द्र सागर के अनुसार, जयपुर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए जुलाई के दौरान विशेष अभियान चलाया गया। जांच में सामने आया कि इन महिलाओं के वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद वे भारत में रह रही थीं।
इनमें से कुछ महिलाएं निजी किराए के मकानों में रह रही थीं, जबकि अधिकांश को जयपुर में संचालित स्पा सेंटरों से पकड़ा गया। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनके विरुद्ध नियमानुसार डिपोर्टेशन की कार्रवाई की गई।
एफआरओ ने मकान मालिकों, होटल, गेस्ट हाउस, होम-स्टे और अन्य आवास उपलब्ध कराने वाले संचालकों से अपील की है कि किसी भी विदेशी नागरिक को ठहराने से पहले उसके पासपोर्ट और वीजा की वैधता की जांच अवश्य करें।
आवास प्रदाताओं को विदेशी नागरिकों से संबंधित निर्धारित सूचना समय पर ऑनलाइन दर्ज करने तथा सी-फॉर्म संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की भी सलाह दी गई है। लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित मकान मालिक, व्यक्ति अथवा संस्थान के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
भारत में लागू आव्रजन व्यवस्था के तहत विदेशी नागरिकों के प्रवेश, ठहरने और देश से बाहर जाने के लिए वैध दस्तावेज आवश्यक हैं। आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 ने विदेशी नागरिकों की निगरानी, पंजीकरण और वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान किया है। कानून में नियमों का उल्लंघन करने वाले विदेशी नागरिक को डिपोर्ट करने की शक्ति भी दी गई है।
एफआरओ अधिकारियों ने कहा कि जयपुर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा। इसका उद्देश्य विदेशी नागरिकों के ठहराव से संबंधित नियमों का प्रभावी पालन और शहर में उनकी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है।