



अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने सरकार पर दुग्ध उत्पादकों की अनदेखी का आरोप लगाया, भुगतान नहीं होने पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
जयपुर। राजस्थान के जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों ने मुख्यमंत्री दूध उत्पादक संबल योजना और मिड-डे मील योजना की बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। संघ पदाधिकारियों का दावा है कि दोनों मदों में करीब ₹300-₹300 करोड़, यानी कुल लगभग ₹600 करोड़ का भुगतान लंबित है।
जयपुर में सोमवार को आयोजित जिला दुग्ध संघों के अध्यक्षों की बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री दूध उत्पादक संबल योजना के तहत ₹5 प्रति लीटर की दर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पिछले सात महीने से लंबित है। योजना के तहत राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹650 करोड़ का बजट प्रावधान किया था।
चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकारी भुगतान समय पर नहीं मिलने के कारण जिला दुग्ध संघों को दूध खरीद, पशुपालकों के भुगतान और दैनिक संचालन के लिए बैंकों से ऋण लेना पड़ रहा है। इससे संघों पर अनावश्यक ब्याज का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादक किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार को संबल योजना और मिड-डे मील से जुड़ी देनदारियों का तत्काल निस्तारण करना चाहिए।
रामचंद्र चौधरी ने सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड के राजस्थान में संभावित विस्तार पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के माध्यम से राजस्थान की मौजूदा सहकारी डेयरी प्रणाली और सरस ब्रांड को कमजोर किया जा सकता है।
सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एक बहुराज्यीय सहकारी संस्था है, जिसे मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट के तहत देशभर की दुग्ध सहकारी संस्थाओं को जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। संस्था के आधिकारिक विवरण के अनुसार, इसका उद्देश्य अमूल के सहकारी मॉडल का विभिन्न राज्यों में विस्तार करना है।
चौधरी ने कहा कि जिला दुग्ध संघ किसी भी ऐसी व्यवस्था का विरोध करेंगे, जिससे राजस्थान के लाखों पशुपालकों, ग्राम स्तरीय दुग्ध समितियों और जिला संघों के हित प्रभावित हों। इससे पहले भी अजमेर डेयरी से जुड़े पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी दी थी।
बैठक में आगामी 23 अगस्त को अजमेर में ‘सरस सहकार महाकुंभ’ आयोजित करने की घोषणा की गई। प्रस्तावित कार्यक्रम में प्रदेशभर के दुग्ध उत्पादक किसानों, ग्राम दुग्ध सहकारी समितियों, जिला दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया जाएगा।
महाकुंभ में लंबित अनुदान, मिड-डे मील भुगतान, सहकारी डेयरी व्यवस्था की स्वायत्तता और प्रस्तावित बहुराज्यीय डेयरी ढांचे सहित विभिन्न मुद्दों पर आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
चौधरी ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर प्रदेश के दुग्ध उत्पादक दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही सहकारी संघों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा।
डेयरी संघ चेयरमैन ने आरोप लगाए हैं कि डेयरी संघों के पास बटर, घी, मिल्क पाउडर का बड़ी मात्रा में स्टॉक है। दूसरे राज्यों के बड़ी कंपनियां बल्क में इनकी खरीद करना चाहती है, जिसका अच्छा दाम वे देने को तैयार है। लेकिन आरसीडीएफ की तरफ से इनकी बिक्री नहीं करने दी जाती।
एसपीसीडीएफ को केन्द्र सरकार का सपोर्ट
करीब एक साल पहले बनी सरदार पटेल को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लि. (SPCDF) जो एक मल्टी स्टेट सोसायटी है, उसके राजस्थान में विस्तार पर भी डेयरी संघों ने चिंता जताई है।
SPCDF को सपोर्ट देने के लिए केन्द्र सरकार ला सकती है नया बिल
डेयरी संघ के चेयरमैनों का आरोप है कि इस एसपीसीडीएफ को सपोर्ट देने के लिए केन्द्र सरकार एक नया बिल ला सकती है। इस बिल में राज्यों में बनी जिला दुग्ध सहकारी समितियां खत्म हो सकती है। साथ ही आरसीडीएफ जैसी अन्य दूसरे राज्यों में बनी कंट्रोलिंग बॉडी का भी अस्तित्व खत्म हो जाएगा और सहकारिता विषय राज्यों की सूची से हटकर केन्द्र की सूची में आ जाएगा।
जयपुर में हुई बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया। ज्ञापन में दोनों योजनाओं की बकाया राशि तत्काल जारी करने, जिला दुग्ध संघों पर पड़ रहे ब्याज भार की भरपाई और राजस्थान की मौजूदा सहकारी डेयरी संरचना को सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी।
बैठक में अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी, जोधपुर संघ के अध्यक्ष रामलाल बिश्नोई, नागौर संघ के अध्यक्ष जीवराम घायल, बीकानेर संघ के अध्यक्ष नोपाराम जाखड़, टोंक संघ के प्रतिनिधि जितेंद्र चौधरी और जयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के रमन यादव सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।