Friday, 24 July 2026

थार की रेत में हिलोरें लेगा ‘समंदर’, जैसलमेर में तैयार हुआ 28 किमी परिधि का विशाल जलाशय


थार की रेत में हिलोरें लेगा ‘समंदर’, जैसलमेर में तैयार हुआ 28 किमी परिधि का विशाल जलाशय

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जयपुर। राजस्थान के थार मरुस्थल में जल संचय की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जैसलमेर जिले के घांटियाली क्षेत्र में इंदिरा गांधी मुख्य नहर की आरडी-1356 एस्केप संरचना को करीब 28 किलोमीटर परिधि वाले विशाल जलाशय के रूप में विकसित किया गया है। मानसून के दौरान नहर में आने वाला अतिरिक्त पानी अब इस जलाशय में संग्रहित किया जाएगा, जिससे जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पेयजल की बढ़ती आवश्यकता पूरी करने में सहायता मिलेगी।

राज्य सरकार के अनुसार, बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर में लगभग 1,406 मिलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) पानी संग्रहित किया जा सकेगा। विशाल क्षेत्र में फैले इस जलाशय में पानी भरने के बाद रेगिस्तान के बीच समुद्र जैसा दृश्य दिखाई देगा। इसकी परिधि करीब 28 किलोमीटर है और यह मोहनगढ़ के निकट इंदिरा गांधी नहर की आरडी-1356 पर स्थित है।

मानसून का अतिरिक्त पानी अब नहीं होगा व्यर्थ

इंदिरा गांधी मुख्य नहर में विभिन्न स्थानों पर एस्केप संरचनाएं बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य नहर में अधिक जल प्रवाह अथवा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना है।

मानसून के दौरान पंजाब से नहर में अतिरिक्त पानी आने और सिंचाई की मांग कम होने पर भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण जल का बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं आ पाता था। अब इस अतिरिक्त पानी को एस्केप रिजर्वायर में संग्रहित कर पेयजल योजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।

जलाशय को मानसून के दौरान अतिरिक्त नहरी पानी से भरा जाएगा। नहरबंदी अथवा आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में संग्रहित पानी का उपयोग जैसलमेर और बाड़मेर के लिए सुरक्षित पेयजल भंडार के रूप में किया जा सकेगा।

चार स्थानों पर एस्केप रिजर्वायर की योजना

जल जीवन मिशन के अंतर्गत इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में चार एस्केप रिजर्वायर विकसित करने की योजना बनाई गई है। इनमें बीकानेर के सत्तासर क्षेत्र में आरडी-507, गजनेर लिफ्ट परियोजना क्षेत्र में आरडी-750, जोधपुर क्षेत्र में आरडी-1121 और जैसलमेर में आरडी-1356 का जलाशय शामिल है।

राज्य सरकार के अनुसार, आरडी-507 और बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर का कार्य पूरा हो चुका है। आरडी-750 और आरडी-1121 से जुड़े कार्य भी योजना के अंतर्गत आगे बढ़ाए जा रहे हैं। चारों रिजर्वायरों के विकास के लिए करीब 1,274 करोड़ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख किया गया है।

43 वृहद पेयजल परियोजनाओं को मिलेगा अतिरिक्त पानी

चारों एस्केप रिजर्वायरों से जल जीवन मिशन की 43 वृहद पेयजल परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने की योजना है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के 6,707 गांवों के 20 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है।

विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती एवं मरुस्थलीय जिलों में गर्मी और नहरबंदी के समय पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न होती रही है। बुर्जी-1356 रिजर्वायर से दोनों जिलों के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित जल स्रोत उपलब्ध होगा।

औसतन 13 मीटर गहरा, रिसाव रोकने के लिए बिछाई HDPE शीट

राज्य सरकार के अनुसार, बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर की औसत गहराई करीब 13 मीटर है। रेतीली मिट्टी में पानी का रिसाव रोकना इसके निर्माण की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में शामिल था।

इसके समाधान के लिए जलाशय की तली और ढलानों पर विशेष हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन यानी एचडीपीई शीट बिछाई गई है। यह परत पानी को रेतीली जमीन में रिसने से रोकने और लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण बनाए रखने में सहायता करेगी।

जलाशय को मोहनगढ़ स्थित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जलापूर्ति प्रणाली से जोड़ा गया है। यहां से संग्रहित पानी को शोधन संयंत्र तक पहुंचाने के लिए भारी क्षमता वाली पाइपलाइन भी बिछाई गई है।

नहरबंदी के दौरान बनेगा सुरक्षित जल भंडार

इंदिरा गांधी नहर में हर वर्ष मरम्मत और रखरखाव के लिए नहरबंदी की जाती है। इस अवधि में पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।

बुर्जी-1356 रिजर्वायर में संग्रहित पानी नहरबंदी के समय जैसलमेर और बाड़मेर के लिए सुरक्षित जल भंडार के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे आपात परिस्थितियों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने और टैंकरों अथवा अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

मरुस्थलीय क्षेत्रों में मजबूत होगा जल प्रबंधन

राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लंबे समय से धीमी गति से चल रही एस्केप रिजर्वायर परियोजनाओं के कार्य में तेजी लाई गई। बुर्जी-1356 जलाशय के पूरा होने को पश्चिमी राजस्थान में वैज्ञानिक जल प्रबंधन और अतिरिक्त नहरी पानी के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह परियोजना केवल जल भंडारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे मरुस्थलीय क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा, जल जीवन मिशन की परियोजनाओं और भविष्य की बढ़ती मांगों को पूरा करने में भी सहायता मिलने की अपेक्षा है।

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