



नई दिल्ली। सहारा समूह के कर्मचारियों की वर्षों से लंबित वेतन एवं अन्य देय राशि के दावों के निस्तारण की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने न्यायालय मित्र यानी एमिकस क्यूरी की उस सिफारिश को स्वीकार कर लिया, जिसमें कर्मचारियों के दावों की स्वतंत्र जांच और सत्यापन के लिए एक कमेटी गठित करने का सुझाव दिया गया था।
कमेटी का प्रमुख कार्य यह निर्धारित करना होगा कि दावा प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति वास्तव में सहारा समूह का प्रामाणिक कर्मचारी था या नहीं। कर्मचारी की पहचान एवं सेवा अवधि प्रमाणित होने के बाद उसके लंबित वेतन और अन्य स्वीकार्य देय राशि की गणना की जाएगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने भी स्पष्ट किया था कि सहारा की ओर से प्रस्तुत कर्मचारीवार आंकड़ों को स्वतंत्र सत्यापन के बिना स्वीकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने कर्मचारी की सेवा अवधि, बकाया वेतन और कुल देय राशि की जांच के लिए स्वतंत्र समिति बनाने के संकेत दिए थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कमेटी में शामिल सदस्यों का चयन स्वयं न्यायालय करेगा। कमेटी की संरचना, अधिकार क्षेत्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का उल्लेख अदालत के विस्तृत आदेश में किया जाएगा।
कमेटी कर्मचारियों की संख्या और उनके भौगोलिक वितरण के आधार पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, लखनऊ तथा अन्य आवश्यक स्थानों पर बैठकें कर सकेगी। इससे कर्मचारियों को अपने दावे और दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक ही स्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
कमेटी के सामने आने वाले दावों की संख्या और उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए उसकी कार्यप्रणाली तय की जाएगी। कमेटी स्वयं यह निर्धारित कर सकेगी कि सत्यापन किस क्रम में किया जाए, कर्मचारियों से कौन-कौन से दस्तावेज मांगे जाएं और पूरी प्रक्रिया कितने समय में संपन्न की जा सकती है।
कमेटी को मुख्य रूप से दो विषयों की जांच करनी होगी—
दावा करने वाला व्यक्ति सहारा समूह का वास्तविक और प्रामाणिक कर्मचारी है या नहीं।
संबंधित कर्मचारी को वेतन एवं अन्य मदों में कितनी राशि का भुगतान किया जाना बाकी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कमेटी प्रारंभिक चरण में केवल सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित अंतरिम आवेदनों यानी IA में उपलब्ध दावों और सूचियों पर विचार करेगी।
इसमें सहारा समूह की ओर से प्रस्तुत कर्मचारियों की मुख्य सूची तथा विभिन्न कर्मचारी समूहों अथवा पक्षकारों द्वारा पहले से दाखिल अंतरिम आवेदन शामिल होंगे। पुराने आंकड़ों का सत्यापन पूरा होने से पहले नए अंतरिम आवेदनों को तत्काल विचार के लिए नहीं लिया जाएगा।
पहले की सुनवाई में सहारा ने 16 हजार से अधिक कर्मचारियों तथा सहकारी संस्थाओं से जुड़े लगभग नौ हजार अन्य कर्मचारियों के दावों से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जाने की बात कही थी। अदालत ने कहा था कि कर्मचारीवार रिकॉर्ड उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है और प्रत्येक दावे की स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की कोई सूची, आवेदन अथवा आवश्यक दस्तावेज अभी लंबित हैं तो उन्हें दो दिन के भीतर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
निर्धारित अवधि में प्राप्त दस्तावेज भी कमेटी को सत्यापन के लिए सौंपे जाएंगे। सुनवाई के दौरान संकेत दिया गया कि आवश्यक सामग्री प्राप्त होने के बाद अदालत एक सप्ताह के भीतर कमेटी के गठन और उसकी कार्यप्रणाली से संबंधित आदेश जारी करेगी।
औपचारिक लिखित आदेश उपलब्ध होने के बाद कमेटी की अंतिम संरचना, सदस्यों के नाम और कार्य की निश्चित समय-सीमा स्पष्ट होगी।
अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के दावों पर टुकड़ों में विचार करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। सहारा समूह के सभी संबंधित कर्मचारियों के दावों को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाएगा, ताकि समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सके।
पीठ ने यह भी कहा कि पूरे मामले पर कर्मचारियों के कल्याण और उनके लंबे समय से लंबित अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाना चाहिए। पहले की सुनवाई में भी अदालत ने कर्मचारियों के दावों को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
कमेटी सबसे पहले अदालत में उपलब्ध कर्मचारी सूचियों और अंतरिम आवेदनों में दिए गए आंकड़ों का सत्यापन करेगी। इस दौरान नियुक्ति पत्र, कर्मचारी कोड, वेतन रिकॉर्ड, बैंक विवरण, उपस्थिति, सेवा अवधि और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
मौजूदा डेटा का सत्यापन पूरा होने के बाद ही अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले नए दावों अथवा अतिरिक्त अंतरिम आवेदनों पर विचार किया जाएगा। इससे एक ही कर्मचारी के नाम पर दोहरा दावा होने या अप्रमाणित व्यक्तियों के शामिल होने की संभावना को कम किया जा सकेगा।
कमेटी सहारा की ओर से पहले से लंबित अंतरिम आवेदन में दर्शाई गई राशि का सत्यापन करेगी। जांच के बाद जो प्रारंभिक राशि प्रमाणित पाई जाएगी, उसे जारी करने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
इसके बाद किसी कर्मचारी के दावे और सत्यापित राशि में अंतर सामने आता है तो उस भिन्नता का अलग से परीक्षण किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को निर्विवाद और प्रमाणित राशि का भुगतान अनावश्यक रूप से लंबित होने से रोकना है।
हालांकि कर्मचारियों को भुगतान किस खाते या संपत्ति से किया जाएगा और धन जारी करने की अंतिम प्रक्रिया क्या होगी, इसका निर्णय कमेटी की रिपोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश के आधार पर होगा। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि स्वतंत्र सत्यापन के बिना तत्काल कोई राशि जारी नहीं की जाएगी।
कमेटी बनने के बाद कर्मचारियों को अपनी नियुक्ति, सेवा और बकाया राशि से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। ऐसे में नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, कर्मचारी कोड, वेतन पर्ची, बैंक स्टेटमेंट, आयकर या पीएफ रिकॉर्ड, त्यागपत्र अथवा सेवा समाप्ति से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अदालत के विस्तृत आदेश और कमेटी की ओर से आधिकारिक प्रक्रिया घोषित होने से पहले कर्मचारियों को किसी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था को मूल दस्तावेज अथवा धनराशि देने से बचना चाहिए।