



जयपुर। राजस्थान में सितंबर से नवंबर के बीच प्रस्तावित पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डों एवं संबंधित पदों के आरक्षण की लॉटरी निकालने के लिए अधिकृत किया है।
प्रदेश में 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों के चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में प्रस्तुत रोडमैप में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक संपन्न कराने की बात कही है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 5 अगस्त तक सरकार को मिलने की संभावना है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित सिफारिशों का अध्ययन किया जाएगा और उसी के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण का निर्धारण आगे बढ़ेगा।
हालांकि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सर्वेक्षण की समय-सीमा 26 जुलाई तक बढ़ाई गई है। प्रारंभिक समय-सीमा तक प्रदेश में करीब 69.86 प्रतिशत सर्वेक्षण ही पूरा हो सका था। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट का कार्यक्रम सर्वेक्षण और आंकड़ों के संकलन की प्रगति पर निर्भर रहेगा।
अधिसूचना के अनुसार, आरक्षण की लॉटरी अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर आयोजित की जाएगी। जिला परिषद से संबंधित वार्डों और जिला स्तर के पदों की आरक्षण प्रक्रिया जिला मुख्यालय पर कलेक्टर की निगरानी में कराई जा सकती है।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर के वार्डों और सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी संबंधित उपखंड मुख्यालय पर एसडीओ अथवा एसडीएम की निगरानी में निकाली जाएगी। लॉटरी की तारीख, समय और स्थान की जानकारी संबंधित जिला प्रशासन द्वारा अलग से जारी की जाएगी।
इस प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षण को लागू किया जाएगा। जनसंख्या, संवैधानिक प्रावधानों, आयोग की सिफारिशों और पंचायती राज निर्वाचन नियमों के आधार पर सीटों का वर्गीकरण किया जाएगा।
लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षित और अनारक्षित वार्डों तथा पदों की अंतिम सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम, नामांकन, मतदान और मतगणना की तारीखों का औपचारिक ऐलान करेगा।
राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के लिए मतदाता सूचियों, मतदान केंद्रों और अन्य प्रारंभिक व्यवस्थाओं से संबंधित निर्देश जारी कर चुका है।
प्रस्तावित पंचायती राज चुनावों में चार करोड़ से अधिक मतदाताओं के भाग लेने की संभावना है। चुनाव के माध्यम से पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य चुने जाएंगे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपसरपंच, प्रधान, उपप्रधान, जिला प्रमुख और उपजिला प्रमुख के चुनाव होंगे।
प्रदेश में लंबे समय से पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लंबित होने के कारण कई संस्थाओं का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जा रहा है। हाईकोर्ट में सरकार की ओर से प्रस्तुत कार्यक्रम के बाद अब परिसीमन, आरक्षण और चुनावी तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार की प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार पहले नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद सितंबर में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना है।
आरक्षण निर्धारण और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग अंतिम चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। इसलिए मतदान की वास्तविक तारीखें निर्वाचन आयोग की औपचारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होंगी।
आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया शुरू होने की सूचना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान और जिला परिषद सदस्य पद के दावेदारों की नजर अब अपने क्षेत्र की सीट के आरक्षित अथवा सामान्य घोषित होने पर रहेगी।
लॉटरी के परिणाम के बाद ही संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट होगी। नए परिसीमन के कारण कई ग्राम पंचायतों और वार्डों में पुराने राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।