Thursday, 23 July 2026

राहुल गांधी और विपक्ष अराजक गतिविधियों को दे रहे समर्थन: डॉ. अरुण चतुर्वेदी


राहुल गांधी और विपक्ष अराजक गतिविधियों को दे रहे समर्थन: डॉ. अरुण चतुर्वेदी

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जयपुर। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्ष के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी दल विद्यार्थियों की समस्याओं पर सार्थक चर्चा करने के बजाय राजनीतिक हंगामा खड़ा करने और देश में अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. चतुर्वेदी वर्तमान में राजस्थान के राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं।

उन्होंने कहा कि संसद परिसर और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन करना कांग्रेस की राजनीतिक मर्यादा के विपरीत है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे गंभीर विषय पर विपक्ष को संसद में चर्चा करनी चाहिए, लेकिन वह बहस के बजाय विरोध और व्यवधान का रास्ता अपना रहा है।

राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने पेपर लीक के मुद्दे और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया था। पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को वहां से हिरासत में लेकर बाद में रिहा कर दिया था।

‘विपक्ष को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए’

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए कि वे लोकतांत्रिक एवं कानूनसम्मत विरोध के साथ हैं या हिंसा, उपद्रव और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वाले तत्वों के साथ।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के नाम पर देश की व्यवस्था को चुनौती देने और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरोध करने का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा अथवा अराजकता का समर्थन नहीं किया जा सकता।

डॉ. चतुर्वेदी ने राहुल गांधी द्वारा यूपीए सरकार के समय एक अध्यादेश की प्रति फाड़ने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक आचरण पहले भी संस्थागत मर्यादाओं के विरुद्ध रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रधानमंत्री पद और संसद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहा है।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने की आलोचना

डॉ. चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी सांसदों के धरने को अनुचित बताते हुए कहा कि संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस प्रकार का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास संसद में अपनी बात रखने, सरकार से जवाब मांगने और बहस करने का पूरा अवसर है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचकर धरना देना केवल राजनीतिक प्रदर्शन और टकराव पैदा करने का प्रयास है।

‘सरकार कार्रवाई के लिए तैयार, विपक्ष चर्चा से बच रहा’

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों की शीघ्र सुनवाई और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि सरकार जांच और कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि यदि संसद में पेपर लीक पर विस्तृत बहस होगी तो विपक्ष शासित राज्यों में हुई परीक्षाओं की अनियमितताओं पर भी प्रश्न उठेंगे।

गहलोत सरकार के कार्यकाल का किया उल्लेख

डॉ. चतुर्वेदी ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राजस्थान में कांग्रेस शासन के दौरान अनेक भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे, लेकिन उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने किसी मंत्री से इस्तीफा नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि आज पेपर लीक के मुद्दे पर मुखर कांग्रेस नेताओं ने अपने शासन के दौरान सामने आए मामलों में अपेक्षित राजनीतिक जवाबदेही नहीं दिखाई। समकालीन रिपोर्टों में गहलोत सरकार के कार्यकाल में कम से कम 15 पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया गया था, हालांकि विभिन्न राजनीतिक दल इनकी संख्या को लेकर अलग-अलग दावे करते रहे हैं।

उन्होंने सचिन पायलट द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अजमेर से जयपुर तक निकाले गए मार्च का भी उल्लेख किया। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय अपने ही नेताओं की मांगों को राजनीतिक चुनौती के रूप में लिया।

‘विद्यार्थियों के नाम पर राजनीति कर रही कांग्रेस’

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस का मौजूदा आंदोलन विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान से अधिक राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व युवाओं को गुमराह कर रहा है और उनकी वास्तविक समस्याओं को राजनीतिक टकराव का माध्यम बना रहा है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक के दोषियों पर कठोर कार्रवाई, परीक्षाओं की पारदर्शिता और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सभी राजनीतिक दलों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। इस संवेदनशील विषय पर हिंसा, अव्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संसद में तथ्यात्मक एवं रचनात्मक चर्चा की जानी चाहिए।

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