Thursday, 23 July 2026

RPSC हिंदी प्राध्यापक भर्ती में फर्जी डिग्री का मामला, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक सहित दो आरोपी एसओजी की गिरफ्त में


RPSC हिंदी प्राध्यापक भर्ती में फर्जी डिग्री का मामला, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक सहित दो आरोपी एसओजी की गिरफ्त में

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जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्राध्यापक (हिंदी), स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में कथित फर्जी शैक्षणिक डिग्री के माध्यम से चयन का प्रयास करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रकरण में मुख्य सहयोगी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया है। एसओजी दोनों की भूमिका और फर्जी डिग्री नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जांच कर रही है।

अभ्यर्थी को फर्जी एमए हिंदी की डिग्री उपलब्ध कराने का आरोप

एसओजी की जांच के अनुसार, भर्ती परीक्षा में एक अभ्यर्थी ने चित्तौड़गढ़ के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से जारी एमए हिंदी की डिग्री प्रस्तुत की थी। आरपीएससी की ओर से दस्तावेज का सत्यापन कराए जाने पर संबंधित डिग्री विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं किया जाना सामने आया। इसके बाद अजमेर के सिविल लाइंस थाने में फर्जी दस्तावेज और असत्य शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि अशोक विश्नोई ने मध्यस्थों और विश्वविद्यालय से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों से संपर्क कर अभ्यर्थी के लिए फर्जी अंकतालिका एवं डिग्री उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दस्तावेज तैयार कराने के बदले कितनी राशि ली गई और इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ने कोर्ट में किया सरेंडर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी सुशील कुमार शर्मा मेवाड़ यूनिवर्सिटी में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत था। उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद एसओजी ने उसे अपनी अभिरक्षा में लेकर न्यायालय में आवश्यक कार्रवाई की।

जांच में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी एमए हिंदी की अंकतालिका, डिग्री और अन्य दस्तावेज तैयार किए। इनमें कथित रूप से विश्वविद्यालय की मुहर और अधिकारियों के हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किया गया।

दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

एसओजी आरोपियों से फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया, इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर और ई-मेल खातों, डिग्री की छपाई, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर तथा अभ्यर्थियों से हुए आर्थिक लेन-देन के संबंध में पूछताछ कर रही है।

पूर्व की जांच में यह भी सामने आया था कि कथित फर्जी डिग्री को छपवाने के लिए निजी ई-मेल खाते से दस्तावेज दिल्ली स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस को भेजे गए थे। इसके बाद दस्तावेज विश्वविद्यालय लाकर उन पर संबंधित अधिकारियों के कथित हस्ताक्षर कराए गए।

भर्ती परीक्षा में दो अभ्यर्थियों की डिग्री पर हुआ था संदेह

प्रकरण वर्ष 2022 की हिंदी स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा से संबंधित है। जांच के अनुसार, दो अभ्यर्थियों ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी की कथित एमए हिंदी डिग्रियों के आधार पर आवेदन किया था। परीक्षा परिणाम के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान डिग्रियों पर संदेह हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा। बाद में जांच एसओजी को सौंप दी गई।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से अन्य अभ्यर्थियों को भी फर्जी अथवा पिछली तारीखों में तैयार की गई डिग्रियां उपलब्ध कराई गई थीं या नहीं। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस अनुसंधान और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर होगी।




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