



जयपुर। राजस्थान पुलिस ने ‘महिला सुरक्षा संकल्प’ अभियान के तहत प्रदेशभर में विशेष जनसंपर्क एवं सुरक्षा अभियान चलाकर 7,834 एकल बुजुर्ग महिलाओं और अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिक दंपतियों से उनके घर पहुंचकर मुलाकात की। पुलिस अधिकारियों और थाना स्तर के पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ नागरिकों का कुशलक्षेम जाना, उनकी समस्याएं सुनीं और हर परिस्थिति में त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में संचालित यह अभियान राजस्थान पुलिस के स्थायी आदेश के अनुरूप चलाया गया। इसका उद्देश्य अकेले जीवन व्यतीत कर रहे वरिष्ठ नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत करना, उन्हें स्थानीय पुलिस से जोड़ना और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।
अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने वरिष्ठ नागरिकों से व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं के संबंध में संवाद किया। उन्हें महिला सुरक्षा संबंधी उपायों, साइबर अपराधों से बचाव और आपातकालीन सहायता सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों को आपातकालीन हेल्पलाइन 112, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की हेल्पलाइन 1930 और महिला सहायता हेल्पलाइन 1090 के उपयोग के संबंध में जागरूक किया।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, अभियान के दौरान करौली में सर्वाधिक 960 वरिष्ठ नागरिकों से संपर्क किया गया। जोधपुर शहर पश्चिम में 580, सवाई माधोपुर में 493, अजमेर में 458, बाड़मेर में 320, बालोतरा में 283 और भीवाड़ी में 244 बुजुर्ग महिलाओं एवं वरिष्ठ दंपतियों से पुलिस ने मुलाकात की।
इसी तरह खैरथल-तिजारा में 217, कोटा ग्रामीण में 211, जयपुर ग्रामीण में 186, सीकर में 167, डीग में 163, राजसमंद में 159, सिरोही में 157 और कोटा शहर में 150 वरिष्ठ नागरिकों से संपर्क किया गया। टोंक और बूंदी में 143-143 बुजुर्ग महिलाओं एवं दंपतियों से पुलिस ने घर पहुंचकर संवाद किया।
प्रदेशभर में एक साथ संचालित अभियान के माध्यम से राजस्थान पुलिस ने हजारों परिवारों तक ‘सुरक्षा, सम्मान और विश्वास’ का संदेश पहुंचाया। वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिजनों ने पुलिस की पहल को समाज एवं पुलिस के बीच भरोसा मजबूत करने वाला कदम बताया।
उदयपुर में अकेली रह रही एक बुजुर्ग महिला को आशंका थी कि बेटा नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद रिश्तेदार मकान पर कब्जा कर सकते हैं। पुलिस अधीक्षक ने उनके घर पहुंचकर मुलाकात की और उन्हें संपत्ति एवं अन्य कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
पुलिस से आश्वासन मिलने के बाद महिला ने कहा कि अब उन्हें तसल्ली है कि कोई व्यक्ति उनके मकान पर अवैध कब्जा नहीं कर सकेगा।
उदयपुर में ही पुलिस टीम एक सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी के घर भी पहुंची। बिना किसी शिकायत के पुलिस को कुशलक्षेम पूछने आया देखकर दंपती ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने इसे बुजुर्गों के प्रति राजस्थान पुलिस की संवेदनशील और मानवीय सोच का उदाहरण बताया।
धौलपुर के सरमथुरा थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के कारण अपने परिवार से अलग रह रहे बुजुर्ग नथुआ राम मीना की पुलिस ने काउंसलिंग कराई। पुलिस के प्रयासों से उनके पुत्र और अन्य परिजनों ने बुजुर्ग को सम्मानपूर्वक घर वापस ले जाकर उनकी देखभाल करने का भरोसा दिया।
लंबे समय बाद परिवार का साथ मिलने पर बुजुर्ग ने प्रसन्नता व्यक्त की। पुलिस ने परिजनों को भविष्य में उनकी उपेक्षा नहीं करने और आवश्यक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए भी समझाइश की।
झालावाड़ जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष शिकायत रजिस्टर संधारित किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित बीट अधिकारी प्रत्येक 15 दिन में वरिष्ठ नागरिक से व्यक्तिगत रूप से या फोन के माध्यम से संपर्क करता है।
इस दौरान शिकायत की स्थिति, बुजुर्ग की कुशलक्षेम और किसी नई समस्या के संबंध में जानकारी ली जाती है। आवश्यकता होने पर पुलिस की ओर से तत्काल कार्रवाई की जाती है। इस व्यवस्था को अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में विकसित किया जा रहा है।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान एवं विश्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। समाज के कमजोर, अकेले और जरूरतमंद नागरिकों तक स्वयं पहुंचकर उनमें सुरक्षा का भरोसा कायम करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।
डीजीपी ने कहा कि राजस्थान पुलिस भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी अभियानों के माध्यम से महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।