Thursday, 23 July 2026

सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दावों की स्वतंत्र जांच के बाद ही जारी होगी राशि


सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दावों की स्वतंत्र जांच के बाद ही जारी होगी राशि

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नई दिल्ली। सहारा समूह के हजारों कर्मचारियों के वर्षों से लंबित वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा देयकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि सेबी-सहारा रिफंड खाते से कोई राशि जारी करने से पहले कर्मचारियों के दावों का सत्यापन करने के लिए एक स्वतंत्र कमेटी गठित की जाएगी।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने सोमवार, 20 जुलाई को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी कर्मचारी को राशि जारी करने का आदेश नहीं दिया जा रहा है। पीठ ने कहा कि प्रस्तावित कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद ही भुगतान के संबंध में आगे का आदेश पारित किया जाएगा।

कर्मचारी था या नहीं, सेवा अवधि और बकाया राशि की होगी जांच

प्रस्तावित कमेटी यह सत्यापित करेगी कि दावा प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति वास्तव में सहारा समूह का कर्मचारी था या नहीं। इसके साथ ही उसकी नियुक्ति, सेवा अवधि, लंबित वेतन, ग्रेच्युटी तथा अन्य देयकों का रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा।

जांच पूरी होने के बाद कमेटी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट के आधार पर अदालत तय करेगी कि किस कर्मचारी का दावा स्वीकार किया जाए और सेबी-सहारा रिफंड खाते से कोई राशि जारी की जा सकती है या नहीं।

सहारा ने 25 हजार से अधिक कर्मचारियों का रिकॉर्ड पेश करने की बात कही

सुनवाई के दौरान सहारा की ओर से बताया गया कि सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड और उससे संबंधित कंपनियों के 16 हजार से अधिक कर्मचारियों का कर्मचारीवार रिकॉर्ड तैयार किया गया है।

इसके अतिरिक्त सहारा कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े करीब नौ हजार कर्मचारियों के दावों का विवरण भी अदालत के समक्ष पेश किए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, पीठ ने कहा कि सहारा की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को स्वतंत्र सत्यापन के बिना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘कर्मचारियों का सबसे पहले ध्यान रखना होगा’

कर्मचारियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कई कर्मचारियों को लगभग दस वर्षों से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इस पर पीठ ने कहा कि सबसे पहले कर्मचारियों का ध्यान रखना होगा।

अदालत की इस टिप्पणी को कर्मचारियों के वेतन और अन्य सेवा देयकों को प्राथमिकता दिए जाने के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भुगतान का अंतिम निर्णय दावों के सत्यापन और आगामी न्यायिक आदेश के बाद ही होगा।

24 जुलाई को कमेटी की संरचना पर विचार

सुप्रीम कोर्ट अब शुक्रवार, 24 जुलाई को प्रस्तावित कमेटी के सदस्यों, कार्यप्रणाली, जांच की समय-सीमा और उस पर आने वाले खर्च के संबंध में विचार करेगा।

अदालत ने संबंधित पक्षों के अधिवक्ताओं से भी कमेटी की प्रस्तावित संरचना और कामकाज को लेकर सुझाव प्रस्तुत करने को कहा है। इन सुझावों पर विचार करने के बाद ही कमेटी के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र के संबंध में औपचारिक आदेश आने की संभावना है।

भुगतान की तारीख अभी तय नहीं

कर्मचारियों को बकाया राशि कब मिलेगी, इसे लेकर अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की है। भुगतान से पहले कर्मचारियों के दावों का सत्यापन, कमेटी की रिपोर्ट और उस रिपोर्ट पर अदालत का आदेश आवश्यक होगा।

इसलिए नवरात्र या दीपावली से पहले भुगतान होने की बात फिलहाल केवल अनुमान है। सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश के बिना भुगतान की तारीख या राशि को निश्चित नहीं माना जा सकता।

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