



गुरुग्राम। शिक्षाविद् एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का गुरुवार को 26वां दिन है। वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू में उपचाराधीन हैं। अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं, शिक्षा सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में 28 जून को जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मंगलवार को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया था।
बुधवार शाम विभिन्न विपक्षी दलों के 15 सांसद वांगचुक से मिलने और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील करने मेदांता अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने सांसदों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद सांसद अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। उनके पास 55 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र था, जिसे बाद में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो को सौंपा गया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सहित प्रतिनिधिमंडल में शामिल सांसदों ने सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्रियों को वांगचुक से मिलने की अनुमति दी गई, लेकिन विपक्षी सांसदों को क्यों रोका गया। पुलिस की ओर से अस्पताल के चिकित्सा और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला दिया गया।
इसके बाद वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि लंबा अनशन करने के बावजूद वह जीवित हैं और उनसे मिलने आए सांसदों ने अनशन समाप्त करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्पष्ट भरोसा दे कि आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों और युवा प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक अथवा अनावश्यक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी तो वह अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं किए जाने की भी मांग की है।
वांगचुक ने अपने खुले पत्र में कहा कि वह जीवन और अपने शिक्षा संबंधी कार्यों में लौटना चाहते हैं, लेकिन आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं को संभावित कानूनी कार्रवाई के बीच छोड़कर अनशन समाप्त नहीं कर सकते। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही के मुद्दे पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता बताई।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सोनम वांगचुक ने उन्हें एक खुला पत्र भेजा है और सरकार इसका औपचारिक जवाब देगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है और पत्र का उत्तर देने के बाद संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।
नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार शाम अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की थी और उनसे स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। नड्डा ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारी समूह की ओर से लिखित रूप में प्रस्तुत मांगों पर भी विचार कर रही है।
पिछले दिनों हुए विरोध-प्रदर्शनों और अस्पताल के बाहर समर्थकों के पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए मेदांता परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अस्पताल के प्रवेश द्वारों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और मरीजों, तीमारदारों तथा कर्मचारियों की पहचान की जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। परिसर और इमरजेंसी ब्लॉक के आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।