



अजमेर। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने ई-मेल के माध्यम से अजमेर के सरकारी कार्यालय और जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की कथित झूठी धमकियां देने वाले युवक को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुजरात के सोमनाथ पाटन स्थित वेणेश्वर सोसायटी निवासी फलदू हार्दिक रमेशचन्द के रूप में हुई है।
पुलिस आरोपी को मंगलवार, 21 जुलाई की देर रात अजमेर लेकर पहुंची। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे प्रकरण में गिरफ्तार कर बुधवार, 22 जुलाई को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस अजमेर सहित राजस्थान के अन्य जिलों में भेजे गए धमकी भरे ई-मेल और किसी संभावित नेटवर्क से उसके संबंधों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 9 जुलाई को घूघरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को ई-मेल भेजा गया था। इसमें कार्यालय परिसर को जहरीली साइनाइड गैस और बम के माध्यम से निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।
इसके चार दिन बाद 13 जुलाई को अजमेर जिला एवं सेशन न्यायालय को भी धमकी भरा ई-मेल भेजा गया। ई-मेल में न्यायालय परिसर में छह जिलेटिन बम लगाए जाने और विस्फोट करने का दावा किया गया था। दोनों धमकियां जांच में झूठी पाए जाने के बाद सिविल लाइंस थाने में प्रकरण दर्ज किए गए थे।
धमकी भरे ई-मेल मिलने के बाद पुलिस ने साइबर तकनीकी साक्ष्यों, आईपी विवरण और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान संदिग्ध की लोकेशन गुजरात के सोमनाथ पाटन क्षेत्र में सामने आई।
इसके बाद अजमेर पुलिस की टीम ने गुजरात में दबिश देकर आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए अजमेर लेकर आई।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से धमकी भरे ई-मेल भेजने के उद्देश्य, इस्तेमाल किए गए मोबाइल या कंप्यूटर, ई-मेल अकाउंट, इंटरनेट कनेक्शन और अपनाए गए तकनीकी माध्यम के संबंध में पूछताछ की जाएगी।
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आरोपी ने ई-मेल अकेले भेजे थे या उसके साथ अन्य लोग भी शामिल थे। राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पिछले कुछ महीनों के दौरान कलेक्टर कार्यालयों, न्यायालयों और अन्य संस्थानों को मिली बम धमकियों में भी उसकी कोई भूमिका रही है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस आरोपी के डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के आधार पर प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा कर सकती है। आरोपी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस अनुसंधान और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर होगी।