Thursday, 23 July 2026

मानसरोवर पत्रकार कॉलोनी सामुदायिक भवन मामले में हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 21 अगस्त तक सुविधाएं बहाल करने के निर्देश


मानसरोवर पत्रकार कॉलोनी सामुदायिक भवन मामले में हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 21 अगस्त तक सुविधाएं बहाल करने के निर्देश

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को पूर्व की तरह सुविधायुक्त बनाकर स्थानीय निवासियों के उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर जयपुर विकास प्राधिकरण के रवैये पर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि सामुदायिक भवन में आवश्यक सुविधाएं 21 अगस्त 2026 तक बहाल कर दी जाएं, ताकि स्थानीय निवासी रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इसका उपयोग कर सकें।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने गुरुवार, 23 जुलाई को वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। मामले को अनुपालन की समीक्षा के लिए 31 अगस्त को फिर सूचीबद्ध किया गया है।

कोर्ट ने पूछा—त्योहार कहां मनाएंगे स्थानीय निवासी ?

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सामुदायिक भवन स्थानीय नागरिकों के सार्वजनिक एवं सामाजिक उपयोग के लिए है। यदि भवन में जरूरी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो कॉलोनी के निवासी त्योहार और सामुदायिक कार्यक्रम कहां आयोजित करेंगे।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए से कहा कि केवल भवन को कार्यालय से खाली कर देना पर्याप्त नहीं है। उसे पूर्व की तरह उपयोग योग्य बनाते हुए आवश्यक नागरिक सुविधाएं भी बहाल करनी होंगी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने जेडीए को सामुदायिक भवन खाली कर सार्वजनिक उपयोग के लिए बहाल करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भवन को सरकारी कार्यालय के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने लगाया आदेश की पालना नहीं करने का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निधि बिस्सा, तपिश सारस्वत और अनीश भदाला ने हाई कोर्ट को बताया कि पूर्व आदेश के बावजूद जेडीए ने सामुदायिक भवन को पहले जैसी सुविधाओं के साथ उपयोग योग्य नहीं बनाया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कहा कि भवन में आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय निवासी इसका व्यावहारिक रूप से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में न्यायालय के पूर्व आदेश की वास्तविक और प्रभावी पालना नहीं हुई है।

जेडीए ने मांगा ढाई महीने का समय

जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने हाई कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राधिकरण ने 13 जुलाई को संबंधित भवन को दोबारा सामुदायिक भवन के रूप में उपयोग करने का आदेश जारी कर दिया है। सामुदायिक भवन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 10 लाख रुपए की राशि खर्च करने निर्णय किया है। 

जेडीए की ओर से कहा गया कि भवन में आवश्यक निर्माण, मरम्मत और सुविधाओं की व्यवस्था सीधे विभागीय स्तर पर नहीं की जा सकती। इसके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्राधिकरण ने यह कार्य पूरा करने के लिए करीब ढाई महीने का समय मांगा।

हालांकि अदालत ने स्थानीय निवासियों की आवश्यकता और आगामी त्योहारों को देखते हुए जेडीए को 21 अगस्त तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

18 हजार रुपये शुल्क देकर किया जा सकेगा उपयोग

जेडीए ने हाईकोर्ट को बताया कि सामुदायिक भवन को अब निर्धारित शुल्क जमा कर सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बुक कराया जा सकेगा। भवन के उपयोग के लिए करीब 18 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किए जाने की जानकारी भी हाईकोर्ट को दी गई।

हाईकोर्ट खंडपीठ अब 31 अगस्त को मामले की दोबारा सुनवाई कर यह समीक्षा करेगी कि जेडीए ने सामुदायिक भवन को पूरी तरह सुविधायुक्त और स्थानीय निवासियों के उपयोग योग्य बनाया है अथवा नहीं।

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