



जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर युवाओं और विद्यार्थियों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी के मामले में जांच एजेंसियों द्वारा बरामद की गई राशि उन परिवारों की सहायता के लिए दी जानी चाहिए, जिन्होंने NEET पेपर लीक प्रकरण से आहत होकर अपने बच्चों को खोया है।
सचिन पायलट बुधवार को जयपुर स्थित डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी के प्रांगण में आयोजित छात्र-संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। यह कार्यक्रम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान ‘छात्रों की गूंज’ के अंतर्गत आयोजित किया गया था।
मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे की कथित चोरी के मामले में जो धन बरामद हुआ है, उसका उपयोग जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए।
पायलट ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की अनिश्चितता के कारण निराशा तथा अवसाद का सामना करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों की मदद करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी युवा द्वारा अपनी जान देना समाज और व्यवस्था के लिए अत्यंत दुखद स्थिति है तथा ऐसे परिवारों को आर्थिक एवं संस्थागत सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित गबन के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आठ आरोपियों को हिरासत में लिया था। बाद में आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया और जांच के दौरान नकदी तथा कथित रूप से गबन की राशि से खरीदे गए वाहनों की बरामदगी की भी सूचना सामने आई।
पायलट ने दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की निंदा की। उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं को लेकर राजधानी पहुंचे विद्यार्थियों से संवाद किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि निहत्थे विद्यार्थियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई सरकार की संवेदनहीनता और संवादहीनता को दर्शाती है। दिल्ली में विद्यार्थियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी चिंता व्यक्त करते हुए जांच और जवाबदेही की मांग की है।
सचिन पायलट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों की राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के विरुद्ध दर्ज मामलों को वापस लिया जाए तथा संसद में NEET पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पायलट ने कहा कि केवल जांच का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति को दंडित किया गया।
NEET पेपर लीक को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे अथवा बर्खास्तगी की मांग कर रहा है। इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही भी प्रभावित हुई है।
पायलट ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देश में करीब 150 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या युवाओं के लिए एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक संकट बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और उनके परिवार अपनी आय तथा संसाधनों का बड़ा हिस्सा उनकी शिक्षा पर खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों विद्यार्थियों का समय, मेहनत और व्यवस्था पर विश्वास भी टूटता है।
सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के आंदोलन को विदेशी फंडिंग, विदेशी एजेंसियों अथवा सरकार को अस्थिर करने की साजिश से जोड़कर वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का मूल मुद्दा पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा है। सरकार को विद्यार्थियों की शिकायतें सुनकर पारदर्शी जांच, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना चाहिए।
पायलट ने कहा कि देश के युवा किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक शक्ति और संपत्ति हैं। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस संसद के भीतर और बाहर विद्यार्थियों के अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और जवाबदेही की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगी।