



नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन पर बधाई देने के लिए उनके सरकारी आवास पर जुटे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बैठक के बाद अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया। पूर्व निर्धारित सार्वजनिक घोषणा नहीं होने के कारण कांग्रेस का यह प्रदर्शन सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी अप्रत्याशित रहा।
मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से मल्लिकार्जुन खड़गे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इसके कुछ समय बाद खड़गे ने छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में जन्मदिन नहीं मनाने की घोषणा कर दी।
एक दिन पहले दिल्ली में छात्र और युवा प्रदर्शनकारियों के मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के विरुद्ध आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।
दोपहर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता खड़गे को जन्मदिन की बधाई देने के लिए उनके सरकारी आवास पहुंचे। बाहर से यह सामान्य जन्मदिन मुलाकात दिखाई दे रही थी, लेकिन इसी दौरान आगे की विरोध रणनीति पर भी चर्चा की गई।
बैठक समाप्त होने के बाद नेता अपनी गाड़ियों में बैठने के बजाय अचानक पैदल ही प्रधानमंत्री आवास की दिशा में बढ़ने लगे। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन और पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध ‘चलो पीएम हाउस’ मार्च बताया।
खड़गे के सरकारी आवास और प्रधानमंत्री आवास के बीच दूरी कम होने के कारण कांग्रेस नेता कुछ ही समय में लोक कल्याण मार्ग के निकट पहुंच गए। अचानक शुरू हुए मार्च की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने रास्ते में बैरिकेडिंग की तथा प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान नेताओं के साथ बल प्रयोग किया गया, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन को कार्रवाई का आधार बताया।
प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन के बाद कहा कि कांग्रेस नेता वहां पहुंचे, जहां सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को उनके पहुंचने की उम्मीद नहीं थी। कांग्रेस ने इस मार्च को छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध के समर्थन में उठाया गया कदम बताया।