Tuesday, 21 July 2026

विधवा की फैमिली पेंशन मामले में हाईकोर्ट सख्त, बिना तैयारी पेश हुए अधिकारी पर जताई नाराजगी


विधवा की फैमिली पेंशन मामले में हाईकोर्ट सख्त, बिना तैयारी पेश हुए अधिकारी पर जताई नाराजगी

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राजस्थान हाईकोर्ट ने विधवा महिला की फैमिली पेंशन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जिस प्रकार विभागीय अधिकारी बिना आवश्यक रिकॉर्ड और तैयारी के न्यायालय में उपस्थित हुआ, उससे प्रतीत होता है कि राज्य के अधिकारी अदालती कार्यवाही को अपेक्षित गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

जस्टिस गणेश राम मीणा की अदालत ने यह टिप्पणी गंगा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। शनिवार को अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के कारण सरकारी वकील अदालत में उपस्थित नहीं थे। ऐसी स्थिति में पेंशन एवं पेंशन कल्याण विभाग के सहायक लेखाधिकारी और मामले के ऑफिसर इन चार्ज हमीर सिंह अदालत में पेश हुए।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारी से विभाग की ओर से दाखिल जवाब, याचिकाकर्ता के दावे तथा उससे संबंधित सरकारी आदेशों और अधिसूचनाओं के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारी ने अदालत को बताया कि उनके पास न तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं और न ही आवश्यक सरकारी आदेश एवं अधिसूचनाएं मौजूद हैं।

इसके बाद अदालत ने अधिकारी से पूछा कि क्या उन्होंने ऑफिसर इन चार्ज के कर्तव्यों और राज्य सरकार की लिटिगेशन पॉलिसी का अध्ययन किया है। इस पर अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी राज्य की लिटिगेशन पॉलिसी नहीं देखी। अदालत ने इस स्थिति को विभागीय लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।

संवेदनशील मामले में लापरवाही स्वीकार्य नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी सामान्य विवाद से संबंधित नहीं है, बल्कि एक विधवा महिला की फैमिली पेंशन जैसे संवेदनशील अधिकार से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामले में भी विभागीय अधिकारी का बिना पूरी केस फाइल, आवश्यक रिकॉर्ड और तथ्यों की जानकारी के न्यायालय में उपस्थित होना स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारण से सरकारी अधिवक्ता अदालत में उपस्थित न हो, तो संबंधित ऑफिसर इन चार्ज की जिम्मेदारी है कि वह पूरी केस फाइल, संबंधित सरकारी आदेश, अधिसूचनाएं, विभागीय जवाब और मामले के सभी आवश्यक तथ्यों की जानकारी के साथ न्यायालय में उपस्थित हो।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विभागों को समय पर जवाब दाखिल करना चाहिए, ताकि न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक देरी न हो और पात्र व्यक्तियों को उनके वैधानिक एवं सेवा संबंधी लाभों के लिए लंबे समय तक न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

सभी विभागों के OIC को निर्देश जारी करने के आदेश

अदालत ने आदेश की प्रति राजस्थान के मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव तथा निदेशक, पेंशन एवं पेंशन कल्याण विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार से कहा गया है कि सभी विभागों के ऑफिसर इन चार्ज को उनकी जिम्मेदारियों और राज्य की लिटिगेशन पॉलिसी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की विभागीय लापरवाही की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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