



राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी किए संशोधित निर्देश, दोषसिद्धि और विचाराधीन गंभीर मामलों का देना होगा पूरा विवरण
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों को अब अपने विरुद्ध हुई दोषसिद्धि, सजा, लंबित अपील तथा विचाराधीन गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी निर्धारित घोषणा पत्र में देनी होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं जिला कलेक्टरों को संशोधित निर्देश जारी किए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा की ओर से 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका के सदस्य पद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी से राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 के अंतर्गत निर्धारित घोषणा पत्र और परिशिष्ट-दो प्राप्त किया जाए।
आयोग ने राज्य सरकार द्वारा 25 मार्च 2026 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 के खंड-17 को हटाए जाने के बाद ये संशोधित निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही आयोग ने 21 अक्टूबर 2019 को जारी अपने पूर्व आदेश को अधिक्रमित कर दिया है। संशोधित व्यवस्था में मुख्य रूप से अभ्यर्थियों की दोषसिद्धि और विचाराधीन आपराधिक मामलों से संबंधित सूचनाओं पर जोर दिया गया है।
निर्धारित घोषणा पत्र में अभ्यर्थी को बताना होगा कि क्या उसे किसी न्यायालय ने किसी अपराध में दोषसिद्ध घोषित किया है। दोषसिद्धि होने की स्थिति में संबंधित न्यायालय का नाम, दोषसिद्धि की तारीख, अपराध का विवरण, लगाई गई सजा तथा कारावास से रिहा होने की तारीख भी बतानी होगी।
आयोग के निर्देशों के अनुसार, नैतिक अधमता से संबंधित अपराध अथवा किसी अन्य अपराध में छह माह या उससे अधिक की सजा पाने वाला व्यक्ति कारावास से मुक्त होने की तारीख से छह वर्ष तक नगरपालिका सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा।
नगरपालिका अधिनियम की धारा 245 के अंतर्गत किसी अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति तथा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अंतर्गत दोषसिद्ध व्यक्ति भी निर्वाचन के लिए अयोग्य होगा।
दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील अथवा पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत किए जाने पर अभ्यर्थी को संबंधित न्यायालय, अपील या प्रार्थना पत्र संख्या, उसकी वर्तमान स्थिति तथा स्थगन आदेश से संबंधित जानकारी देनी होगी।
अभ्यर्थी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी दोषसिद्धि पर न्यायालय ने रोक लगाई है अथवा केवल सजा के क्रियान्वयन को स्थगित किया गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिस अभ्यर्थी के विरुद्ध पांच वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध में सक्षम न्यायालय ने संज्ञान लेकर आरोप तय कर दिए हैं, वह संबंधित मामला विचाराधीन रहने तक नगरपालिका सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा।
अभ्यर्थी को घोषणा पत्र के दूसरे भाग में ऐसे सभी आपराधिक मामलों का विवरण देना होगा। इसमें मुकदमा संख्या, संबंधित अधिनियम एवं धाराएं, न्यायालय का नाम, आरोप तय किए जाने की तारीख तथा न्यायालय से मिली रोक का विवरण शामिल होगा।
इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी को यह भी बताना होगा कि उसके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 110 के अंतर्गत कार्यवाही संस्थित हुई है या नहीं तथा धारा 117 के तहत प्रतिभूति देने का कोई आदेश पारित किया गया है अथवा नहीं।
आयोग के अनुसार, राजस्थान विधानसभा सदस्य के निर्वाचन के लिए किसी कानून के अंतर्गत अयोग्य व्यक्ति नगरपालिका सदस्य पद का चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य होगा। हालांकि 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुका व्यक्ति केवल 25 वर्ष से कम आयु होने के आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा।
नगरपालिका सदस्य के निर्वाचन में अयोग्यता निर्धारित करने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के प्रावधान भी लागू होंगे।
नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका वार्ड के चुनाव में नामांकन प्रस्तुत करते समय अभ्यर्थी को निर्धारित घोषणा पत्र तथा परिशिष्ट-दो संलग्न करना होगा। किसी अभ्यर्थी के घोषणा पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर रिटर्निंग अधिकारी उसे परिशिष्ट-तीन के प्रारूप में नोटिस देकर घोषणा पत्र जमा कराने का अवसर देगा।
अभ्यर्थी को नामांकन पत्रों की संवीक्षा शुरू होने से पहले घोषणा पत्र रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित समय तक घोषणा पत्र जमा नहीं करने की स्थिति में रिटर्निंग अधिकारी संबंधित नामांकन पत्र को अस्वीकार कर सकेगा।
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नामांकन पत्रों की संवीक्षा के दौरान सभी प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाए।

