



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस मुख्यालय पहुंचकर साइबर अपराध नियंत्रण की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर साइबर ठगी की रोकथाम, पीड़ितों को त्वरित राहत, तकनीकी संसाधनों और जांच तंत्र को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार सभी आवश्यक सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को साइबर ठगी के मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने आर-4-सी यानी राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया। अधिकारियों ने उन्हें सेंटर की तकनीकी कार्यप्रणाली, साइबर शिकायतों के विश्लेषण, संदिग्ध खातों और मोबाइल नंबरों की निगरानी तथा विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों की पहचान, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को समझा।
मुख्यमंत्री ने साइबर क्राइम कंट्रोल रूम में राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं हेल्पलाइन पर एक साइबर ठगी पीड़ित की समस्या सुनी।
उन्होंने यह जानकारी ली कि शिकायत मिलने के बाद उसका विवरण किस तरह दर्ज किया जाता है और उसे संबंधित पुलिस थाने तथा बैंक को किस प्रणाली के माध्यम से भेजा जाता है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि साइबर ठगी की शिकायत प्राप्त होते ही पीड़ित के बैंक खाते, संदिग्ध लेन-देन और आरोपी के खाते से संबंधित जानकारी जुटाई जाती है।
शिकायत को संबंधित बैंक और पुलिस थाने तक तत्काल भेजने का प्रयास किया जाता है, ताकि ठगी की राशि को समय रहते होल्ड कराया जा सके। मुख्यमंत्री ने इस पूरी व्यवस्था को और अधिक तेज तथा प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर के लाइव डैशबोर्ड को भी देखा। डैशबोर्ड पर प्रदेशभर से प्राप्त शिकायतों, वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों, होल्ड कराई गई राशि और जिला स्तर पर की जा रही कार्रवाई की स्थिति प्रदर्शित की जाती है।
उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों के निस्तारण, लंबित मामलों और पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बदलता हुआ क्षेत्र है। इससे निपटने के लिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित रूप से डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा विश्लेषण और नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने साइबर थानों, कंट्रोल रूम और जिला स्तर की टीमों को आवश्यक उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध की रोकथाम में जनजागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आमजन को ओटीपी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, लिंक फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए जाने चाहिए।
उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने के निर्देश दिए।