



जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और मूल्यांकन में गड़बड़ियों से देश के युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं के लिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
पायलट शनिवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर चलाए जा रहे देशव्यापीअभियान छात्रों की गूंज के तहत एनएसयूआई की ओर से जयपुर में आयोजित ‘छात्र-संविधान संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
सचिन पायलट ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था, विविधता और संविधान है। देश को आगे बढ़ाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की आवाज सुनना और असहमति का सम्मान करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी केवल निर्णय लेना नहीं, बल्कि युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों की चिंताओं को समझकर उनका समाधान करना भी है।
पायलट ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। इसके बावजूद पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने और परिणामों में कथित गड़बड़ियों से विद्यार्थियों को मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं किसी एक व्यक्ति के स्तर पर संभव नहीं होतीं, बल्कि इनके पीछे संगठित तंत्र होने की आशंका रहती है। इसलिए केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच कर शीर्ष स्तर तक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। सरकार को ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। दोषियों के खिलाफ समयबद्ध जांच और कठोर दंड से ही परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों का विश्वास बहाल हो सकेगा।
पायलट ने दावा किया कि देश गंभीर बेरोजगारी की समस्या से गुजर रहा है। उच्च शिक्षित युवाओं को भी सीमित और छोटे पदों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन करना पड़ रहा है, जबकि रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बावजूद सरकार ने प्रभावी जवाबदेही तय नहीं की। उन्होंने कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूल मुद्दों पर ठोस जवाब देने के बजाय जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनता की दैनिक समस्याओं और युवाओं की चिंताओं पर संसद तथा विधानसभाओं में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। लोकतांत्रिक सरकार को आलोचना और असहमति से बचने के बजाय जवाब देना चाहिए।
पायलट ने मनरेगा, सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे कानूनों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों ने आमजन को अधिकार देने और शासन को जवाबदेह बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान दौर में इन जनकल्याणकारी व्यवस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। पायलट ने कहा कि ऐसी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाकर जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ पहुंचाया जाना चाहिए।
पायलट ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरोप जांच का विषय हैं और संबंधित संस्थाओं को लेन-देन तथा धन के उपयोग की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
पायलट ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन संविधान की भावना के अनुसार पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए आवश्यक है।
सचिन पायलट ने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और न्याय, पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी विद्यार्थियों और युवाओं की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी तथा शिक्षा, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक मंचों पर उठाती रहेगी।