



चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटाने की मांग पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने अभी किसी नेतृत्व परिवर्तन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने प्रदेश के नेताओं से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को सौंप दी है। बघेल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव कोई जल्दबाजी या दबाव में लिया जाने वाला फैसला नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन में परिवर्तन “गुड्डा-गुड़िया का खेल” नहीं है और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व का एक प्रभावशाली वर्ग राजा वड़िंग को प्रदेशाध्यक्ष बनाए रखने के पक्ष में है। इस धड़े का मानना है कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले नेतृत्व बदलने से संगठन में अस्थिरता बढ़ सकती है।
राजा वड़िंग ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी संभाली थी। इसलिए हाईकमान ऐसा संदेश देने से बचना चाहता है कि लंबे समय तक संगठन चलाने वाले नेता को चुनाव से पहले गुटीय दबाव में हटा दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल वड़िंग को पद पर बनाए रखने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं। चन्नी समर्थक नेताओं का तर्क है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में नई व्यवस्था बनाना पार्टी की एकजुटता और चुनावी संभावनाओं के लिए जरूरी है।
चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के समर्थक गुट ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के सामने भी राजा वड़िंग को हटाने की मांग रखी थी। दोनों गुटों के बीच सुलह कराने के प्रयास के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति नहीं बन सकी।
हाईकमान के स्तर पर बैठकों के बीच चन्नी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ‘सारा पंजाब चन्नी दे नाल’ अभियान शुरू किया है। पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस नारे के साथ पोस्ट साझा कर पूर्व मुख्यमंत्री के पक्ष में समर्थन जता रहे हैं।
इस अभियान को प्रदेश नेतृत्व पर दबाव बनाने और चन्नी की राजनीतिक ताकत प्रदर्शित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह अभियान उस समय तेज हुआ, जब भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी।
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को भी दिल्ली बुलाकर कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बातचीत की। इस बैठक के बाद बाजवा पंजाब लौट आए और उन्होंने चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात की।
राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को हाईकमान और असंतुष्ट गुट के बीच संवाद की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, बाजवा अथवा पार्टी नेतृत्व की ओर से प्रदेशाध्यक्ष पद में बदलाव को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।
कांग्रेस हाईकमान के सामने वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव का परिणाम भी महत्वपूर्ण कारक है। उस चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी और चन्नी अपनी दोनों विधानसभा सीटों से हार गए थे।
इसके बाद उनके लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठते रहे। वड़िंग समर्थक नेताओं का तर्क है कि कठिन दौर में संगठन चलाने वाले नेतृत्व को चुनाव से ठीक पहले बदलना कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने पंजाब कांग्रेस के सभी प्रमुख पक्षों से बातचीत कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट हाईकमान को दे दी है। उनके अनुसार, नेतृत्व में बदलाव से संबंधित कोई भी फैसला व्यापक संगठनात्मक हित और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
बघेल इससे पहले यह भी कह चुके हैं कि पंजाब में पार्टी का प्रमुख राजनीतिक चेहरा राहुल गांधी हैं। इस बयान को गुटीय संघर्ष के बीच किसी एक राज्य नेता को सर्वोच्च चेहरा घोषित करने से बचने की रणनीति के रूप में देखा गया।
फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के स्तर पर पंजाब की स्थिति पर विचार किया जा रहा है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव से पहले दोनों गुटों को साथ लाकर संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है।
राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने, नेतृत्व में बदलाव करने अथवा प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच जिम्मेदारियों का नया बंटवारा करने पर अंतिम निर्णय हाईकमान को लेना है। जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, नेतृत्व परिवर्तन से संबंधित दावे राजनीतिक अटकलों और पार्टी सूत्रों की जानकारी तक सीमित हैं।