



नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर सुगबुगाहट बढ़ी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक सरकार या भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि सत्र से पहले यदि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है, तो सरकार नए सिरे से राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधने का प्रयास कर सकती है।
पहले यह संकेत मिल रहे थे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव मानसून सत्र के बाद 15 अगस्त तक भी संभव नहीं है। लेकिन बीते दिनों राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बातचीत के दौरान फिर से यह चर्चा सामने आई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद सत्र से पहले ही मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकते हैं। चर्चा इस बात की भी है कि संभावित फेरबदल में नए और युवा चेहरों को अवसर दिया जा सकता है।
मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच 2021 का उदाहरण भी राजनीतिक गलियारों में याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में 7 जुलाई 2021 को बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल किया था। उस समय 43 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें 36 नए चेहरे शामिल थे और कई प्रमुख मंत्रियों को पद से हटाया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2021 की तरह यदि इस बार भी सत्र से पहले फेरबदल होता है, तो इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा लाना, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधना तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना हो सकता है।
हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 जुलाई तक विदेश यात्रा कार्यक्रम और 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र को देखते हुए फेरबदल की समयसीमा को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि फेरबदल होना है, तो संसद सत्र से पहले सीमित समय में फैसला लिया जा सकता है। वहीं कुछ का मानना है कि सत्र के बाद भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस बार संभावित बदलाव को लेकर भाजपा के भीतर युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों की भूमिका पर भी चर्चा है। एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में राजनीतिक समीकरण पहले की तुलना में अधिक व्यापक हैं, इसलिए किसी भी बदलाव में सहयोगी दलों और राज्यों के प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया जा सकता है।
फिलहाल मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर केवल राजनीतिक चर्चा और संकेत सामने आ रहे हैं। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगा। आधिकारिक घोषणा होने तक इसे संभावित राजनीतिक गतिविधि के रूप में ही देखा जा रहा है।