



जयपुर। प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले ओबीसी आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य सरकार और राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल की अध्यक्षता वाला राज्य ओबीसी आयोग स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, आयोग अपनी रिपोर्ट में सीधे यह नहीं बताएगा कि किस जिले में कौन-सा वार्ड, पंच, सरपंच या अन्य पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होगा। इसके बजाय आयोग जिलेवार यह सिफारिश कर सकता है कि संबंधित जिले में कुल कितनी सीटों या पदों पर ओबीसी समुदाय को आरक्षण दिया जाना चाहिए।
राज्य ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल स्तर पर इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद पंचायत राज और नगरीय निकायों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मौजूदा समय में राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग को लगभग 21 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट में भी इसी के आसपास ओबीसी समुदाय को आरक्षण दिए जाने की सिफारिश किए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम निर्णय रिपोर्ट, कानूनी परीक्षण और सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिपोर्ट को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद सितंबर महीने में नगर निगम, नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के पदों पर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत हैं। इस दौरान ओबीसी आरक्षण के साथ-साथ वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर एससी और एसटी वर्ग के लिए भी आरक्षण निर्धारित किया जाएगा।
इसके बाद ओबीसी, एससी, एसटी और सामान्य वर्ग की श्रेणियों में करीब 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने की प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से पूरी होने की संभावना है। महिलाओं का आरक्षण प्रत्येक वर्ग के भीतर लागू किया जाएगा, जिससे अलग-अलग श्रेणियों में महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट के आदेश, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग की चुनावी तैयारी के बीच अब पूरी प्रक्रिया आरक्षण निर्धारण पर निर्भर मानी जा रही है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनावी कार्यक्रम को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
राजनीतिक दलों की नजर भी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले आरक्षण निर्धारण पर टिकी है। रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और संबंधित विभागों की आगे की कार्यवाही पंचायत और निकाय चुनावों की दिशा तय करेगी।