



जयपुर। प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर नई संभावित समयसीमा सामने आई है। राज्य चुनाव आयोग, नगरीय निकाय और पंचायत विकास निदेशालय से जुड़े आला सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्ड पार्षद निर्वाचन क्षेत्रों में सितंबर के दूसरे सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक दो चरणों में चुनाव कराने का कार्यक्रम तैयार किए जाने के संकेत हैं।
सूत्रों के अनुसार, नगरीय निकाय चुनावों में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति वर्ग के लिए करीब 794 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए लगभग 395 वार्ड पार्षद निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित किए जाने की संभावना है। वहीं ओबीसी समुदाय के लिए आरक्षण का निर्धारण राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की जिलेवार सिफारिश और राज्य सरकार की स्वीकृति के आधार पर किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने और राज्य सरकार द्वारा उसे स्वीकृति दिए जाने के बाद ही नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसके बाद वार्डवार आरक्षण निर्धारण और चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के 41 जिलों में कुल 14,403 पंचायतों के चुनाव अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से नवंबर तक चार चरणों में कराए जाने की संभावना है। इसी अवधि तक राज्य के सभी जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मौजूदा कार्यकाल भी समाप्ति की ओर होगा। ऐसे में जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, सरपंच और पंच पदों के चुनाव अक्टूबर से नवंबर के बीच संपन्न कराने की प्रशासनिक कवायद शुरू होने के संकेत हैं।
चुनावी कार्यक्रम को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची, निर्वाचन क्षेत्रों की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर रहेंगी। पंचायत चुनावों को चार चरणों और नगरीय निकाय चुनावों को दो चरणों में कराए जाने की संभावना इसी आधार पर देखी जा रही है।
राजनीतिक दलों की नजर भी अब ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, आरक्षण निर्धारण और राज्य निर्वाचन आयोग की आगामी घोषणा पर टिकी है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल यह संभावित कार्यक्रम सूत्रों के आधार पर सामने आया है। चुनाव की अंतिम तारीखों और चरणवार कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ही की जाएगी।