



जयपुर। प्रदेश में बस अग्निकांड और सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं के बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने निजी और सरकारी बसों की जांच के लिए एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जयपुर सहित प्रदेश के प्रमुख 12 शहरों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव बसों की जांच करेंगे।
यह अभियान मंगलवार से शुरू हुआ। पहले चरण में लंबी दूरी की लग्जरी बसों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या गंभीर खामियां पाई जाती हैं, तो मौके पर चालान और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों के साथ परिवहन विभाग की टीम भी मौजूद रहेगी।
अभियान को लेकर सोमवार को रालसा के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने संबंधित जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फलौदी सड़क हादसे से संबंधित याचिका में विस्तृत दिशा-निर्देश दे रखे हैं। हाल ही में दौसा जिले में हुए बस हादसे को देखते हुए इस अभियान को गंभीरता से शुरू किया जा रहा है।
रालसा के कार्यकारी अध्यक्ष और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। प्राधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई बस नियमों के विरुद्ध संचालित मिलती है, तो मौके पर ही उसे जब्त करवाया जाए।
इसके साथ ही बस हादसों से प्रभावित यात्रियों को मुआवजा दिलाने के लिए उन्हें स्थायी लोक अदालत में प्रकरण दायर करने की प्रक्रिया के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। संबंधित यात्रियों की आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करवाने में भी सहायता की जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान न्यायिक अधिकारी नवीन किलानया ने बताया कि नगालैंड और आसपास के राज्यों में पंजीकृत बसें भी राजस्थान में संचालित हो रही हैं। इस संबंध में एसओजी में मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई। इस पर रालसा सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने कहा कि यदि एसओजी में कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसे भी गंभीरता से देखा जाएगा।
उन्होंने जिला प्राधिकरणों के सचिवों को निर्देश दिए कि यदि लोक परिवहन यानी निजी बसों में भी नियमों की पालना नहीं हो रही है, तो अभियान के दूसरे चरण में उनकी भी जांच की जाए।
इस अभियान का उद्देश्य बसों में सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करना, यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करना और लापरवाह बस संचालन पर प्रभावी कार्रवाई करना है। बस अग्निकांड और सड़क हादसों की घटनाओं के बाद यह अभियान प्रदेश में यात्री सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।