



जयपुर। जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी और संजय बडाया को एसीबी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एसीबी कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जज राजेश दडिया ने आदेश में कहा कि आरोपी ने मंत्री पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग कर अपराध किया है। कोर्ट ने इसे आमजन के विश्वास से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि महेश जोशी ने कैबिनेट मंत्री के पद पर रहते हुए अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर अपने प्रभाव का उपयोग किया। आरोप है कि टेंडर ऊंची दरों पर जारी करवाए गए और ईरकॉन कंपनी के फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
कोर्ट ने यह भी माना कि वित्त समिति और बीईसी पर नियंत्रण होने के बावजूद टेंडरों के माध्यम से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। आदेश में कहा गया कि रिश्वत की राशि प्राप्त करने से जुड़े आरोपों को लेकर एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत अपराध प्रमाणित मानते हुए चालान भी पेश कर दिया है।
संजय बडाया की जमानत अर्जी पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि चालान में यह तथ्य सामने आया है कि उसकी तत्कालीन मंत्री से निकटता थी। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि उसके पास विभाग से जुड़ी गोपनीय जानकारी उपलब्ध थी। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने संजय बडाया को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।
एसीबी कोर्ट के इस आदेश के बाद जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज की है।