



जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एएनएम भंवरी देवी से जुड़े पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभ मामले में राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने 12 जनवरी 2024 के आदेश का 18 जुलाई 2026 तक पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश की पालना नहीं की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को 21 जुलाई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
याचिकाकर्ता साहिल पेमावत व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा गया कि भंवरी देवी की वर्ष 2011 में हत्या के बाद उनके वारिसों को बकाया सेवा परिलाभ, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाने के संबंध में कोर्ट ने स्पष्ट आदेश पारित किए थे। इसके बावजूद करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी आदेश की पूर्ण पालना नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 12 जनवरी 2024 के आदेश के बाद भी संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे भंवरी देवी के विधिक वारिसों को लंबे समय से बकाया लाभ प्राप्त नहीं हो सके हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि अब भी आदेश का पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति देनी होगी।
कोर्ट ने राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों को 18 जुलाई 2026 तक आदेश की पूर्ण पालना कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।