



जयपुर। ऑल इंडिया ब्राह्मण फेडरेशन का दो दिवसीय राष्ट्रीय महाअधिवेशन रविवार को नारायण धाम, गोपालबाड़ी, जयपुर में संपन्न हुआ। 4 और 5 जुलाई को आयोजित इस महाअधिवेशन में तीन सत्रों के दौरान व्यापक विचार-विमर्श और मंथन के बाद 14 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
महाअधिवेशन में देश के 23 राज्यों से आए करीब 130 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों में ब्राह्मण समाज से जुड़े सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिवेशन में देवालयों के संरक्षण, आर्थिक रूप से पिछड़े ब्राह्मण परिवारों के उत्थान, शिक्षा, सामाजिक समन्वय और देश के विभिन्न राज्यों में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन की मांग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष एस.डी. शर्मा की अध्यक्षता में हुए अधिवेशन में संगठन की मजबूती और समाजहित से जुड़े विषयों पर गंभीर मंथन किया गया। इस अवसर पर एस.डी. शर्मा ने सर्वसम्मति से राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जयपुर महानगर अध्यक्ष मोहन प्रकाश शर्मा को संस्था का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया। उनके मनोनयन का विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने स्वागत किया।
राष्ट्रीय सचिव संगठन अश्विनी तिवारी ने बताया कि अधिवेशन में सेक्रेटरी जनरल द्रोण रविकुमार, टी.एन. शर्मा, कोषाध्यक्ष सूर्यकांत शर्मा, महिला विंग से जुड़े पदाधिकारी, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में केसी दवे, पंकज मिश्रा, सुरेंद्र शर्मा, काशी नाथ मिश्रा, मुकेश जोशी, राम मूर्ति शर्मा, गौरव मिश्रा, सुरेश द्विवेदी, वाई.एन. शर्मा, गुणा निधि मिश्रा, साधना मिश्रा, शैलेंद्र शुक्ला, भरत भाई रावल, रमेश चंद ओझा,प्रदीप मेनन, जितेंद्र भारद्वाज सहित अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया।
राजस्थान ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष आर.एस. जैमिनी और मोहन प्रकाश शर्मा ने अतिथियों व प्रतिनिधियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन केसी दवे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पंकज मिश्रा उत्तर प्रदेश ने प्रस्तुत किया।
अधिवेशन में वक्ताओं ने कहा कि ब्राह्मण समाज को शिक्षा, संगठन, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साथ ही समाज के कमजोर वर्गों की सहायता, युवाओं को दिशा देने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता बताई गई।
