Saturday, 04 July 2026

राजस्थान के मंत्रियों को दिल्ली बुलाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज, कई मंत्रियों बयान बाजी और कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाराज, हटाने की चर्चा


राजस्थान के मंत्रियों को दिल्ली बुलाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज, कई मंत्रियों बयान बाजी और कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाराज, हटाने की चर्चा

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राजस्थान की सियासत में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई मंत्रियों को दिल्ली बुलाए जाने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों की परफॉर्मेंस और संगठनात्मक फीडबैक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज, मंत्रियों की परफॉर्मेंस और विभागीय प्रगति को लेकर फीडबैक ले रहा है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावनाओं को देखते हुए मंत्रियों से उनके कामकाज और उनके खिलाफ आई शिकायतों पर भी जानकारी ली जा रही है।

पिछले दो-तीन दिनों में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर जैसे मंत्रियों के दिल्ली दौरे ने इन चर्चाओं को और बल दिया है। हालांकि संबंधित मंत्रियों की ओर से अपने दिल्ली दौरों को अधिकृत कार्यक्रमों से जोड़ा है। भाजपा के 20 विधायक दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत करा कर आए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में व्यापक पैमाने पर मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कुछ मंत्रियों को बुलाकर विस्तार से चर्चा से यह होता है कि अब राजस्थान में बदलाव की संभावनाएं अधिक नजर आ रही है। मंत्रियों के कामकाज और विधायकों के प्रति व्यवहार और बयान बाजी से भी केंद्रीय नेतृत्व चिंतित है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति वाले विकसित भारत ग्राम योजना कार्यक्रम में शामिल होने का उल्लेख किया। वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने की जानकारी दी। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। इसके बाद शुक्रवार को डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि केंद्रीय नेतृत्व मंत्रियों से उनके विभागों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसंपर्क और संगठन के साथ तालमेल को लेकर फीडबैक ले रहा है। वहीं स्थानीय स्तर पर कुछ आलोचक यह भी कह रहे हैं कि जिन मंत्रियों को लेकर शिकायतें अधिक हैं, उन्हें पहले दौर में दिल्ली बुलाया जा रहा है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

बीते करीब एक साल से राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर समय-समय पर चर्चाएं चलती रही हैं। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले भी प्रदेशों के मंत्रियों और नेताओं को बुलाकर फीडबैक लेने की रणनीति अपनाता रहा है। ऐसे में मौजूदा बैठकों को संगठनात्मक समीक्षा और शासन के आकलन की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल राजस्थान के मंत्रियों के दिल्ली दौरों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कवायद केवल नियमित फीडबैक प्रक्रिया है या मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक फेरबदल की दिशा में कोई बड़ा संकेत।

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