Friday, 03 July 2026

राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से जुड़े सब्सिडी मामले की जांच की मांग


राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से जुड़े सब्सिडी मामले की जांच की मांग

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भाजपा नेता डॉ. विजय विप्लवी ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र, राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत अनुदान स्वीकृति पर उठाए सवाल

उदयपुर। भाजपा नेता, अधिवक्ता एवं पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से जुड़े एक सब्सिडी प्रकरण को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने राजस्थान में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत ग्रीन हाउस निर्माण पर स्वीकृत अनुदान को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

डॉ. विप्लवी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि झाड़ोल तहसील के वेलनिया स्थित राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के फार्म हाउस पर वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत लगभग 22.12 लाख रुपये की लागत से ग्रीन हाउस स्थापित किया गया। उनके अनुसार, इस पर 17.04 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ, जो कुल लागत का लगभग 77 प्रतिशत है।

पत्र में दावा किया गया है कि योजना के प्रावधानों के अनुसार सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तथा लघु एवं सीमांत, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को अधिकतम 70 प्रतिशत तक अनुदान देय है। डॉ. विप्लवी ने सवाल उठाया कि यदि निर्धारित सीमा अधिकतम 70 प्रतिशत है, तो 77 प्रतिशत अनुदान किस आधार पर स्वीकृत किया गया।

डॉ. विप्लवी ने यह भी प्रश्न उठाया है कि राज्यपाल कटारिया सामान्य वर्ग से होने के बावजूद किस आधार पर लघु एवं सीमांत कृषक की श्रेणी में शामिल किए गए। उन्होंने लघु एवं सीमांत कृषक प्रमाण-पत्र की वैधता तथा अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

पत्र में डॉ. विप्लवी ने दावा किया है कि वेलनिया स्थित फार्म हाउस लगभग 33 बीघा भूमि पर चारदीवारी सहित विकसित है, जहां सुविधायुक्त आवास और कुएं बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूणवास और अन्य स्थानों पर भी कृषि भूमि होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को किसी मापदंड के तहत लघु या सीमांत कृषक नहीं माना जा सकता। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

डॉ. विप्लवी ने कहा कि सरकारी अनुदान योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और छोटे किसानों को लाभ पहुंचाना है। यदि किसी प्रभावशाली या संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा नियमों के विपरीत योजना का लाभ लिया जाता है, तो इससे जनविश्वास प्रभावित होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पत्र में डॉ. विप्लवी ने राज्यपाल कटारिया से जुड़े कुछ पूर्व विवादों का भी उल्लेख किया है। इनमें वन भूमि प्रकरण, मूणवास स्टाम्प ड्यूटी प्रकरण, लॉकडाउन के दौरान झाड़ोल जाकर भूमि रजिस्ट्री कराने, हाउसिंग बोर्ड से मकान आवंटन और उदयपुर सर्किट हाउस में नियमित जनसुनवाई जैसे विषयों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

डॉ. विप्लवी ने पत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक ही पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार लोग स्वयं योजनाओं का अनुचित लाभ लेने लगें, तो जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल यह मामला आरोपों और जांच की मांग के स्तर पर है। संबंधित पक्ष या विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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