Wednesday, 15 July 2026

इंडिया न्यूज के ‘मंच जयपुर’ कार्यक्रम: विधानसभा केवल भवन नहीं, लोकतंत्र का जीवंत मंच है: वासुदेव देवनानी


इंडिया न्यूज के ‘मंच जयपुर’ कार्यक्रम: विधानसभा केवल भवन नहीं, लोकतंत्र का जीवंत मंच है: वासुदेव देवनानी

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने वाला भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का जीवंत केंद्र और जनता से सीधे जुड़ा हुआ संस्थान है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद उनका मुख्य उद्देश्य सदन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और जनसरोकारों से जुड़ा बनाना रहा है।

इंडिया न्यूज के ‘मंच जयपुर’ कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में किए गए सुधारों, संसदीय नवाचारों और डिजिटल पहलों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब विधायिका प्रभावी ढंग से कार्य करे और कार्यपालिका विधानसभा के प्रति जवाबदेह रहे।

देवनानी ने कहा कि जब वे पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे, तभी उनके मन में यह विचार था कि विधानसभा को केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम जनता और विशेष रूप से युवाओं से भी इसका सीधा जुड़ाव होना चाहिए। इसी सोच के तहत यूथ पार्लियामेंट जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए, ताकि युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझ सकें और उनमें यह विश्वास पैदा हो कि वे भी भविष्य में लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था का हिस्सा बन सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा चुनाव में लगभग आधे विधायक पहली बार चुनकर आते हैं। ऐसे में उन्हें सदन की प्रक्रिया, नियमों, मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पहली बार नवनिर्वाचित विधायकों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इससे नए विधायकों को विधानसभा की कार्यप्रणाली समझने में सुविधा मिली और वे अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी तरीके से निभाने के लिए तैयार हो सके।

प्रश्नों के समयबद्ध जवाब को लेकर देवनानी ने कहा कि उनका प्रयास रहा है कि विधायक केवल प्रश्न लगाकर सदन से बाहर न जाएं, बल्कि उन्हें निर्धारित समय में जवाब भी प्राप्त हों। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला था, तब पिछली विधानसभा के करीब पांच हजार प्रश्नों के उत्तर लंबित थे। इसके बाद व्यवस्था में सुधार करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि एक सत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर अगले सत्र के शुरू होने से पहले उपलब्ध करा दिए जाएं।

उन्होंने बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में 97 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर समय पर उपलब्ध कराए गए। वहीं वर्तमान सत्र के लगभग 65 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो चुके हैं और अगले सत्र के शुरू होने से पहले शत-प्रतिशत उत्तर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। देवनानी ने कहा कि वे स्वयं अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक कर इस व्यवस्था की निगरानी करते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी और तथ्यात्मक जवाब मिल सके।

सदन में गतिरोध और संवाद के सवाल पर देवनानी ने कहा कि जहां चर्चा होती है, वहां मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन लोकतंत्र की मजबूती संवाद से ही होती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका विवादों का समाधान निकालने की होती है। जब भी सदन में गतिरोध की स्थिति बनती है, वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपने कक्ष में बुलाकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि विधानसभा की कार्यवाही अधिकतम दिनों तक चले। राजस्थान विधानसभा के प्रत्येक सत्र को लगभग 30 से 32 दिनों तक संचालित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो सके। विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक भी सदन की कार्यवाही देख सकें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ सकें।

पूरक प्रश्नों की बेहतर तैयारी के लिए की गई नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए देवनानी ने बताया कि अब संबंधित विधायक को उसके प्रश्न का उत्तर एक दिन पहले रात में ही उपलब्ध करा दिया जाता है। इससे सदस्य अगले दिन सदन में पूरक प्रश्नों की बेहतर तैयारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सदस्य दो पूरक प्रश्न पूछ सकता है, जबकि इसके बाद नेता प्रतिपक्ष को भी पूरक प्रश्न पूछने का अवसर दिया जाता है।

देवनानी ने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक विधायक सदन की पूरी कार्यवाही के दौरान उपस्थित रहें। अब लगभग 50 प्रतिशत सदस्य सत्र समाप्त होने तक सदन में बने रहते हैं, जो संसदीय कार्यवाही के प्रति बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है।

विधानसभा में डिजिटल नवाचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया है। समिति बैठकों में डिजिटल हस्ताक्षर की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और आधुनिक बनी है। उन्होंने बताया कि विधानसभा संग्रहालय देखने के लिए पास व्यवस्था को भी ऑनलाइन करने की योजना पर काम चल रहा है।

देवनानी ने बताया कि अब तक लगभग 45 हजार लोग विधानसभा संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त विधानसभा परिसर में संविधान गैलरी विकसित की गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक विरासत और संसदीय परंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। परिसर में आकर्षक वाटिकाओं का भी विकास किया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन सभी सुधारों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, जवाबदेह और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक विधानसभा की कार्यप्रणाली को समझता है और उससे जुड़ता है, तभी लोकतंत्र में उसकी भागीदारी और विश्वास दोनों मजबूत होते हैं।

राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष का उल्लेख करते हुए देवनानी ने बताया कि यह विधानसभा की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक अवसर है। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की 75 वर्षों की यात्रा को संजोने के लिए विधानसभा की डायरी में दुर्लभ चित्रों, महत्वपूर्ण घटनाओं, परंपराओं और ऐतिहासिक पड़ावों को प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि हीरक जयंती वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में वर्तमान और पूर्व विधायकों को आमंत्रित कर विशेष आयोजन किए जाएंगे, ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय अनुभवों का साझा मंच तैयार हो सके। देवनानी ने कहा कि इन कार्यक्रमों में देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की भी भागीदारी रहेगी। एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि दूसरे कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष की उपस्थिति प्रस्तावित है।

देवनानी ने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली संसदीय परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त बनाना है।

Previous
Next

Related Posts