



जयपुर। सिविल लाइन्स जोन में कथित रिश्वतखोरी प्रकरण सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। निगम ने उपायुक्त सुनील बैरवा को मंगलवार को एपीओ कर मुख्यालय लगा दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस पूरे मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
नगर निगम प्रशासन ने सिविल लाइन्स जोन सहित अन्य शाखाओं के कार्यों का पुनर्वितरण भी किया है। इसके तहत तीन अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
सोमवार को एसीबी ने सिविल लाइन्स जोन के जेईएन संजय बैरवा को 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप किया था। आरोप है कि निर्माणाधीन मकान को सील करने की धमकी देकर रिश्वत मांगी गई थी।
एसीबी की जांच में सामने आया कि जेईएन संजय बैरवा ने स्वयं और तत्कालीन उपायुक्त सुनील बैरवा के नाम पर 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगने की बात कही थी। बाद में कथित तौर पर एक लाख रुपए में सौदा तय हुआ और 20 हजार रुपए पहले ही लिए जा चुके थे।
रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन उपायुक्त सुनील बैरवा का नाम सामने आने के बाद एसीबी उनकी भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं।
नगर निगम प्रशासन ने जांच को देखते हुए सुनील बैरवा को एपीओ कर मुख्यालय लगाने का आदेश जारी किया है। इसे प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
सुनील बैरवा को एपीओ किए जाने के बाद निगम प्रशासन ने सिविल लाइन्स जोन और अन्य शाखाओं में कामकाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए तीन अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है।
निगम प्रशासन का उद्देश्य है कि जोन से जुड़े निर्माण, स्वीकृति, निरीक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित कार्यों को प्राथमिकता से निस्तारित करें।
इस प्रकरण के बाद नगर निगम में निर्माण स्वीकृति, सीलिंग और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि स्वीकृत निर्माण के बावजूद मकान को सील करने और काम रुकवाने की धमकी देकर रिश्वत मांगी गई।
एसीबी इस पूरे मामले में रिश्वत की मांग, पहले ली गई राशि, अधिकारियों के नाम के उपयोग और संभावित मिलीभगत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
फिलहाल सुनील बैरवा को एपीओ किए जाने के बाद अब एसीबी की जांच रिपोर्ट और निगम प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी और जांच एजेंसियों को आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
