



जयपुर। राजस्थान के करीब 20 साल पुराने पांचना बांध जल विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार को जयपुर में हाईलेवल बैठक हुई। सरकार की ओर से तीन मंत्रियों और दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन बैठक में सहमति नहीं बन पाई। विवाद का समाधान निकालने के लिए हुई यह बैठक बेनतीजा रही।
शिक्षा संकुल के माधव सभागार में शाम करीब 8 बजे कमांड एरिया के किसान प्रतिनिधि बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। इसके बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा भी नाराज होकर बैठक से बाहर आ गए। बैठक में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम मौजूद रहे।
तीनों मंत्रियों ने पांचना बांध से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। बैठक में बांध के आसपास के गांवों और कमांड एरिया के किसानों ने अपनी-अपनी मांगें और आपत्तियां रखीं।
सरकार की कोशिश थी कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाकर पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने को लेकर आगे का रास्ता तय किया जाए, लेकिन कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन सकी।
बैठक के बाद जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि यह विवाद 20 साल पुराना है और इसके समाधान में थोड़ा समय लगेगा। उन्होंने कहा कि एक दौर की वार्ता से इस तरह के पुराने विवाद का समाधान संभव नहीं है। आज बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी है और सरकार जल्द ही समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेगी।
जल संसाधन मंत्री रावत ने कहा कि बैठक में कई मुद्दों पर दोनों पक्षों में सहमति थी, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे रहे जिन पर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई। एक पक्ष की ओर से 7 दिन बाद फिर से बैठक करने का प्रस्ताव रखा गया है।
कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ी लाल मीणा के नाराज होकर बैठक से बाहर आने के सवाल पर जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि इसे विवाद कहना सही नहीं होगा। जब दो पक्ष किसी मुद्दे पर बातचीत करते हैं तो सभी अपना पक्ष रखते हैं। इसे आपसी संवाद कहना ज्यादा बेहतर होगा।
रावत ने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा वरिष्ठ मंत्री हैं और वे जिस वर्ग से आते हैं, उस समाज की बात रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि बैठक में किसी तरह की गंभीर टकराव की स्थिति नहीं थी, बल्कि अलग-अलग पक्षों ने अपने विचार रखे।
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने बताया कि बैठक में करीब 8 से 10 बिंदुओं पर चर्चा हुई। इनमें से कई बिंदुओं पर सकारात्मक बातचीत हुई, लेकिन एक-दो बिंदुओं पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी। पानी की टेस्टिंग को लेकर भी कुछ मतभेद सामने आए।
उन्होंने कहा कि 7 दिन पहले या 7 दिन बाद बैठक करने को लेकर कोई विवाद नहीं है। सरकार दोनों पक्षों से संवाद जारी रखेगी और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
पांचना बांध जल विवाद लंबे समय से करौली और सवाई माधोपुर क्षेत्र के गांवों के बीच पानी के बंटवारे से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। एक ओर बांध के आसपास के गांवों के लोग अपने क्षेत्र के जल हितों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कमांड एरिया के किसान नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
कमांड एरिया के किसानों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। वहीं बांध क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पानी छोड़ने से उनके इलाके में जल संकट बढ़ सकता है।
हाईलेवल बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। जल संसाधन मंत्री ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही फिर से बातचीत की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकले, जिससे विवाद भी शांत हो और किसानों को राहत भी मिले।
फिलहाल पांचना बांध जल विवाद को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल बनी हुई है। आने वाले दिनों में होने वाली अगली बैठक इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
