Tuesday, 30 June 2026

पांचना बांध विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा


पांचना बांध विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा

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जयपुर। पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने के विवाद के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर नाराजगी जताई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालती आदेश की पालना के लिए 15 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए स्पष्ट किया कि यदि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर और संबंधित अधिकारी 27 जुलाई को अदालत में पेश हों। यह निर्देश पूर्व विधायक रामकेश मीणा और अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए।

21 साल से पानी नहीं मिलने का मामला

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता सारांश सैनी ने कोर्ट को बताया कि पांचना बांध से वर्ष 1987 से 2005 तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जाता था, लेकिन प्रदेश में गुर्जर आंदोलन के बाद उनकी मांगों पर विचार करते हुए सरकार ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया।

अदालत को बताया गया कि वर्ष 2006 से नहरों के अंतिम छोर पर बसे कमांड एरिया के 35 गांवों के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। इन गांवों में मुख्य रूप से मीणा समुदाय के लोग रहते हैं। पानी नहीं मिलने से किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पहले भी आदेश दे चुका है हाईकोर्ट

याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट वर्ष 2020 और इसी साल अप्रैल-मई में भी नहरों में पानी छोड़ने के आदेश दे चुका है। इसके बावजूद प्रशासन ने आदेशों की पालना नहीं की। इसी पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए सरकार से जवाब मांगा।

कोर्ट ने कहा कि यदि तय समय में आदेश की पालना नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। अदालत के इस रुख के बाद पांचना बांध विवाद में प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ने की संभावना है।

क्या है पांचना बांध विवाद

पांचना बांध विवाद मुख्य रूप से करौली और सवाई माधोपुर जिलों के 74 गांवों के बीच पानी के बंटवारे से जुड़ा है। यह विवाद पिछले करीब 20 वर्षों से चला आ रहा है। बांध के आसपास के 39 गांवों के लोगों का कहना है कि बांध निर्माण में उनकी जमीनें गई थीं, इसलिए पानी पर पहला हक उनका है।

इन गांवों के लोगों को आशंका है कि यदि नहरों में पानी छोड़ा गया तो उनके क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है। वहीं दूसरी ओर नहरों के अंतिम छोर पर बसे कमांड एरिया के 35 गांवों के किसानों का कहना है कि उन्हें वर्ष 2006 से सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है।

किसानों का दावा- हर साल हो रहा करोड़ों का नुकसान

कमांड एरिया के किसानों की मांग है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि पानी नहीं मिलने से उनकी फसलें प्रभावित होती हैं और हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान होता है।

पिछले महीने हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया था। विवाद को लेकर गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। हालांकि सरकार के आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया था।

27 जुलाई तक आदेश की पालना पर नजर

हाईकोर्ट ने सरकार को 15 दिन का समय देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को 27 जुलाई को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

पांचना बांध विवाद लंबे समय से सामाजिक, प्रशासनिक और जल प्रबंधन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में अदालत के सख्त रुख के बाद इस विवाद के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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