



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को बगरू के निमेड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भारतीय सनातन संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। यह कथा व्यक्ति को सन्मार्ग पर चलने, अच्छे कर्म करने और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा में परिवार, समाज और मानव जीवन से जुड़े दायित्वों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भागवत कथा का अनुसरण करने से परिवार में सुख, शांति और खुशहाली का वातावरण बनता है। साथ ही समाज में सद्भाव, सेवा भावना और संस्कारों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमें केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही पद्धति भी सिखाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है। यदि बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे, तो वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति को पूजनीय मानती है। हम नदियों, पर्वतों, वृक्षों और गौ माता की पूजा करते हैं। यह हमारी परंपरा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण और जीवों के प्रति करुणा का भाव हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे आध्यात्मिक आयोजनों से मिलने वाली सीख को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में संस्कार, सद्भाव और सेवा की भावना को आगे बढ़ाएं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का साफा पहनाकर और गौ माता का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया।
कार्यक्रम में विधायक कैलाश वर्मा, संगरिया धूणी से ओमदास जी महाराज और कथावाचक साध्वी सुभद्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संतजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे।