Sunday, 28 June 2026

जयपुर-अजमेर हाईवे पर रफ्तार बढ़ाने के लिए 910 करोड़ की नई परियोजना, बनेंगे 5 नए फ्लाईओवर


जयपुर-अजमेर हाईवे पर रफ्तार बढ़ाने के लिए 910 करोड़ की नई परियोजना, बनेंगे 5 नए फ्लाईओवर

जयपुर। जयपुर-अजमेर हाईवे पर पिछले एक साल में 10 फ्लाईओवर बनने के बावजूद वाहनों की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव, ब्लैक स्पॉट्स और स्थानीय यातायात की आवाजाही के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर वाहन अब भी औसतन 70 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की गति नहीं पकड़ पा रहे हैं।

हाईवे पर यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जयपुर-किशनगढ़ खंड पर 910.90 करोड़ रुपए की नई परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत 90 किलोमीटर लंबे हिस्से में 5 नए फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। साथ ही पूरी सर्विस रोड और ड्रेनेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।

बड़ के बालाजी सहित 5 स्थानों पर बनेंगे फ्लाईओवर

नई परियोजना के तहत बड़ के बालाजी, नसनोता, गिडानी, दांतरी और टोलामल में नए फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर स्थानीय यातायात और हाईवे ट्रैफिक के आपस में मिलने से बार-बार जाम और गति में कमी की स्थिति बनती है। नए फ्लाईओवर बनने के बाद हाईवे पर लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, जयपुर-अजमेर हाईवे पर कई जगह गांवों और कस्बों से सीधे एंट्री-एग्जिट होती है। इसके अलावा कट पॉइंट्स के कारण तेज गति से चल रहे वाहनों को बार-बार धीमा होना पड़ता है। यही वजह है कि फ्लाईओवर बनने के बावजूद हाईवे की औसत स्पीड अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई।

स्थानीय और हाई-स्पीड ट्रैफिक होगा अलग

परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय यातायात और हाई-स्पीड ट्रैफिक को अलग करना है। वर्तमान में हाईवे पर स्थानीय वाहन, दोपहिया, ट्रैक्टर, ग्रामीण यातायात और लंबी दूरी के वाहन एक ही लेन पर दबाव बनाते हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है और वाहनों की गति भी प्रभावित होती है।

नई सर्विस रोड विकसित होने के बाद स्थानीय यातायात को अलग मार्ग मिलेगा। वहीं, हाईवे पर चलने वाले तेज गति के वाहनों को निर्बाध रास्ता मिल सकेगा। इससे यात्रा समय में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा।

ईपीसी मोड पर होगा निर्माण

जयपुर-किशनगढ़ खंड की यह परियोजना ईपीसी मोड पर बनाई जाएगी। परियोजना का ठेका 594.51 करोड़ रुपए में जेएसआई-जेएपीएल संयुक्त उपक्रम को दिया गया है। ईपीसी मोड के तहत निर्माण एजेंसी को तय समय सीमा में डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण कार्य पूरा करना होगा।

परियोजना में फ्लाईओवर के साथ-साथ सर्विस रोड और ड्रेनेज सिस्टम को भी शामिल किया गया है। बरसात के दौरान जलभराव और सड़क की खराब स्थिति से बचने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना भी जरूरी माना गया है।

ब्लैक स्पॉट्स कम करने पर भी फोकस

जयपुर-अजमेर हाईवे प्रदेश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री वाहन, मालवाहक वाहन और स्थानीय वाहन गुजरते हैं। कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट्स और कट पॉइंट्स के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

नई परियोजना के तहत हाईवे की संरचना में सुधार कर इन जोखिमों को कम करने का प्रयास किया जाएगा। फ्लाईओवर और सर्विस रोड बनने से सड़क पार करने, गांवों से आने-जाने और स्थानीय ट्रैफिक के कारण होने वाले अवरोधों में कमी आएगी।

जयपुर-अजमेर सफर होगा सुगम

परियोजना पूरी होने के बाद जयपुर से अजमेर और किशनगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हाईवे पर बार-बार गति कम होने, जाम लगने और स्थानीय कट पॉइंट्स से उत्पन्न समस्याओं में कमी आएगी। इससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगी।

फिलहाल 10 फ्लाईओवर बनने के बाद भी हाईवे की औसत गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है, लेकिन नई परियोजना के पूरा होने के बाद जयपुर-किशनगढ़ खंड पर यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार होने की संभावना है।



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