Sunday, 28 June 2026

कन्हैयालाल मर्डर केस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भाजपा पर हमला, बोले- चार साल बाद भी न्याय अधूरा


कन्हैयालाल मर्डर केस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भाजपा पर हमला, बोले- चार साल बाद भी न्याय अधूरा

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर के कन्हैयालाल मर्डर केस को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को करीब चार वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। गहलोत ने कहा कि भाजपा ने इस संवेदनशील मामले का उपयोग केवल चुनावी फायदे के लिए किया, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए।

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उदयपुर के कन्हैयालाल की नृशंस हत्या को चार वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन” सरकार में न्याय की उम्मीद आज भी अधूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि अपराधियों के भाजपा से संबंधों को लेकर सवाल उठे थे।

गहलोत बोले- 180 में से सिर्फ 21 लोगों की गवाही

गहलोत ने कहा कि मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA के पास है और सुनवाई NIA की विशेष अदालत में चल रही है। केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद अब तक 180 में से केवल 21 लोगों की गवाही हो पाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी और सरकार दोनों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, तो न्याय प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा ने इस मामले को लेकर बड़े-बड़े दावे किए और “5 लाख बनाम 50 लाख” जैसे मुद्दों को प्रचारित किया। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा कभी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की नहीं थी, बल्कि इस घटना के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की थी।

पीएम मोदी और अमित शाह पर भी निशाना

अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रोटियां सेकने के बाद अब जब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री राजस्थान आते हैं, तो कन्हैयालाल का नाम तक नहीं लेते, सजा की बात तो दूर है।

गहलोत ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि भाजपा के इस असली चरित्र को पहचानना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने केवल जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और संवेदनशील घटना को चुनावी मुद्दा बनाकर छोड़ दिया।

क्या था कन्हैयालाल हत्याकांड

कन्हैयालाल हत्याकांड 28 जून 2022 को उदयपुर में हुआ था। दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया गया था कि उन्होंने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसके बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं।

हत्यारों ने इस वारदात का वीडियो बनाकर ऑनलाइन साझा किया था, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। घटना के बाद राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति भी बनी थी। उस समय राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

तत्काल गिरफ्तारी के बाद NIA को सौंपी गई जांच

घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता और आतंकी कनेक्शन की आशंका को देखते हुए जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी गई थी। इसके बाद से मामला NIA की विशेष अदालत में विचाराधीन है।

गहलोत का कहना है कि जिस मामले को भाजपा ने चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाया था, उसमें अब न्याय प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

राजनीतिक बयानबाजी फिर तेज

कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर गहलोत के बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो सकते हैं। कांग्रेस इसे भाजपा की कथनी और करनी के अंतर से जोड़ रही है, वहीं भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर पलटवार की संभावना है।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। लेकिन गहलोत के बयान ने इस संवेदनशील मामले को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

Previous
Next

Related Posts