



नई दिल्ली। देश में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को नार्को कॉ-ऑर्डिनेशन सेंटर यानी एन-कॉर्ड की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में अगले तीन साल में राज्यों को ड्रग्स मुक्त बनाने के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और विभिन्न केंद्रीय तथा राज्य स्तरीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तीन वर्षीय कार्ययोजना का भी विमोचन किया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें कानून, वित्तीय जांच, जागरूकता, पुनर्वास और अंतर-एजेंसी समन्वय को भी मजबूत किया जाएगा।
बैठक में तय किया गया कि ड्रग्स तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। तस्करों के नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। साथ ही अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।
केंद्र सरकार का जोर इस बात पर है कि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को जड़ से समाप्त किया जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि तस्करी से जुड़े मामलों में केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला तक जांच पहुंचाई जाए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एएनटीएफ का नेतृत्व ऐसे अधिकारी के हाथ में होना चाहिए, जो पूर्णकालिक रूप से इस जिम्मेदारी का निर्वहन करे। इससे कार्रवाई में निरंतरता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी।
शाह ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में केंद्र और राज्य सरकारों का समन्वय बेहद जरूरी है। यदि राज्यों की एजेंसियां सक्रिय और संगठित तरीके से काम करेंगी, तो मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
बैठक में एनडीपीएस मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यकतानुसार विशेष अदालतें स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई और सजा की प्रक्रिया प्रभावी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबित मामलों के जल्द निस्तारण से तस्करों पर कानून का दबाव बढ़ेगा।
इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों को सुदृढ़ बनाने और स्कूलों तथा कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जागरूकता अभियान को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यक्रम के रूप में चलाया जाना चाहिए।
बैठक में अफीम और अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती को पूरी तरह समाप्त करने के लिए राज्यों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों की पहचान, निगरानी, समयबद्ध कार्रवाई और वैकल्पिक आजीविका के उपायों पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
केंद्र ने राज्यों से कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती, उत्पादन, परिवहन और बिक्री से जुड़े हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जाए। सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
अमित शाह ने कहा कि जिला स्तर पर आयोजित होने वाली एन-कॉर्ड बैठकों में केवल औपचारिकता नहीं निभाई जाए, बल्कि ठोस निर्णय लेकर उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर बैठक का परिणाम दिखना चाहिए और तय किए गए बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने राजस्थान में ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए अभियानों और अवैध एमडी फैक्ट्रियों पर की गई कार्रवाई की सराहना की। शाह ने सभी राज्यों से समन्वित और परिणाम आधारित अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को जनभागीदारी, तकनीक और मजबूत कानून प्रवर्तन के साथ आगे बढ़ाना होगा।
एन-कॉर्ड की बैठक में जारी तीन वर्षीय कार्ययोजना को ड्रग्स मुक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें तस्करी रोकने, युवाओं को जागरूक करने, नशा मुक्ति सेवाओं को मजबूत करने, अवैध संपत्तियों की जब्ती और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में चलाया जाएगा। राज्यों को अपने-अपने स्तर पर ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले समय में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।