



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर रोजगार और स्वरोजगार के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की इच्छाशक्ति पूरी तरह कमजोर दिखाई दे रही है। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी ही योजनाओं को धरातल पर उतारने और पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है, जिसके कारण राजस्थान का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, राइजिंग राजस्थान और पचपदरा रिफाइनरी जैसे विषयों पर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में युवाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि घोषणाओं और प्रचार से रोजगार नहीं मिलता, इसके लिए योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही जरूरी है।
टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना को लेकर कहा कि सरकार युवाओं को उद्यमी बनाने के दावे कर रही है, लेकिन बैंकों की धीमी प्रक्रिया के कारण हजारों युवाओं के सपने फाइलों में अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई जिलों में 30 प्रतिशत आवेदन भी बैंकों को आगे फॉरवर्ड नहीं किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
जूली ने सवाल उठाया कि जब सरकार आवेदनों को आगे बढ़ाने में ही नाकाम है, तो युवाओं को ऋण कब मिलेगा और वे अपना काम कब शुरू कर पाएंगे। उन्होंने मांग की कि लंबित मामलों की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण युवाओं के आवेदन अटके हुए हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने कहा कि स्वरोजगार योजना केवल कागजों और पोर्टल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि सरकार सच में युवाओं को उद्यमिता से जोड़ना चाहती है, तो बैंकिंग प्रक्रिया को सरल, तेज और जवाबदेह बनाना होगा। युवाओं को समय पर ऋण, अनुदान और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
नेता प्रतिपक्ष ने राइजिंग राजस्थान को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि निवेश के नाम पर बड़े स्तर पर प्रचार किया गया और करोड़ों रुपए के निवेश समझौतों के दावे किए गए, लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकतर परियोजनाएं अभी भी धरातल पर नहीं उतर पाई हैं।
जूली ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के तहत केवल 3,895 परियोजनाओं पर ही काम शुरू हो पाया है, जबकि 83 प्रतिशत से अधिक परियोजनाएं अब भी कागजों में अटकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि केवल इवेंट मैनेजमेंट और एमओयू की संख्या गिनाने से युवाओं को रोजगार नहीं मिलता।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि युवाओं के घर का चूल्हा घोषणाओं से नहीं, बल्कि वास्तविक रोजगार से जलता है। सरकार को इवेंटबाजी छोड़कर निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने, उद्योगों को सुविधा देने और रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
टीकाराम जूली ने पचपदरा रिफाइनरी का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की लेटलतीफी के कारण राजस्थान के युवाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लाखों अवसर छिन गए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष के कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना को अनावश्यक रूप से विलंबित किया गया।
जूली ने कहा कि यदि इस परियोजना में रोड़े नहीं अटकाए जाते, तो पचपदरा रिफाइनरी अब तक पूरी तरह शुरू हो चुकी होती। इसके शुरू होने से प्रदेश के युवाओं को रोजगार, स्थानीय उद्योगों को अवसर और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलता। उन्होंने कहा कि सरकार की सुस्ती ने युवाओं के हक पर चोट की है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान का युवा अब भाजपा सरकार के खोखले वादों और लच्छेदार भाषणों से बहलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि युवा रोजगार चाहता है, योजनाओं का वास्तविक लाभ चाहता है और सरकार से जवाबदेही चाहता है।
जूली ने सरकार से मांग की कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लंबित आवेदनों की समीक्षा की जाए, राइजिंग राजस्थान के एमओयू की वास्तविक प्रगति सार्वजनिक की जाए और पचपदरा रिफाइनरी सहित बड़े प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने युवाओं के रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाएगी।