Friday, 26 June 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज, 8 आरोपी नामजद, तीन गिरफ्तार


राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज, 8 आरोपी नामजद, तीन गिरफ्तार

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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में करीब 18 दिनों बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से एफआईआर दर्ज करा दी गई है। ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर समेत 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, एफआईआर में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं।

एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। जानकारी के अनुसार, मामले में तीन आरोपियों टिन्नू, लवकुश और अनुकल्प को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी पांच आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

7 जून को सामने आया था मामला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने जांच के लिए 13 जून को विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच पूरी कर 23 जून को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसी शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर अब ट्रस्ट की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।

मामला धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा होने के कारण अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के लिए चढ़ावा और दान दिया है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी या गड़बड़ी के आरोपों ने ट्रस्ट की व्यवस्था, निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़े पदाधिकारियों के नाम FIR में नहीं

एफआईआर में 8 आरोपियों को नामजद किया गया है, लेकिन ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों तक सीमित रहेगी या बड़े पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि मामले में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा लिखवा लिया गया है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में फिलहाल इसे जांच और आंतरिक स्तर की प्रक्रिया से जुड़ा दावा ही माना जा रहा है।

वीएचपी अध्यक्ष बोले- जिनका नाम नहीं, उनकी भी जांच हो

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने एफआईआर दर्ज होने पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि वे एफआईआर से संतुष्ट हैं, लेकिन जिन लोगों के नाम एफआईआर में नहीं हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद मामले की जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

यह मामला केवल चोरी या गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ गया है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर ट्रस्ट और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

जांच में कई पहलुओं पर फोकस

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित चोरी किस स्तर पर हुई, चढ़ावे की गणना और जमा प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे, निगरानी व्यवस्था कैसी थी और किन परिस्थितियों में गड़बड़ी की संभावना बनी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए रकम, दस्तावेजों, ड्यूटी चार्ट और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर को इस मामले में पहला बड़ा कानूनी कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था की समीक्षा के आधार पर और खुलासे हो सकते हैं।

फिलहाल पुलिस और एसआईटी की जांच जारी है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावा चोरी या गड़बड़ी में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और इसमें किन लोगों की भूमिका साबित होती है।

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