



बीकानेर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों के विकास और सामरिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने दो नई रेल लाइनों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 2374 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे और करीब 186 किलोमीटर लंबा नया रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। नई रेल लाइनों से सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
अनूपगढ़ से बीकानेर रेल लाइन का लंबे समय से देखा जा रहा सपना भी अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। इस परियोजना की घोषणा केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीकानेर दौरे के दौरान की थी। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों, सामरिक महत्व और विकास की संभावनाओं को देखते हुए इन रेल परियोजनाओं को स्वीकृति देने की बात कही थी।
केंद्र सरकार की ओर से बजट स्वीकृत होने के बाद उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के अंतर्गत अनूपगढ़ से कानासर तक 131 किलोमीटर और रोजड़ी से खाजूवाला तक 54 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इन रेल मार्गों के बनने से अनूपगढ़, पतरोड़ा, घड़साना, रावला और खाजूवाला सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों को नई रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे वर्षों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अनूपगढ़ और आसपास का क्षेत्र गेहूं, सरसों, कपास, ग्वार, मूंग और किन्नू उत्पादन के लिए जाना जाता है। रेल नेटवर्क विकसित होने से कृषि उपज और अन्य वस्तुओं का परिवहन सस्ता, तेज और सुविधाजनक हो सकेगा। इससे किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
नई रेल लाइनों के निर्माण से क्षेत्रीय व्यापार को भी गति मिलेगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, मशीन ऑपरेटरों और श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से आने वाले समय में औद्योगिक निवेश, मंडी व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों और परिवहन सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
रेल सुविधा का लाभ सीमावर्ती गांवों के विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी संस्थानों तक पहुंच आसान होगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक कम समय में पहुंचाने में भी यह रेल नेटवर्क मददगार साबित होगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीकानेर दौरे के दौरान कहा था कि नई रेल लाइनें सीमावर्ती क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और विकास को सरहद तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी। इस परियोजना से सीमावर्ती क्षेत्र केवल आवागमन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी मजबूत होंगे।
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट होने के कारण यह रेल परियोजना सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य उपकरणों, रसद सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की आवाजाही मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर है। नई रेल लाइन बनने के बाद सेना, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए जवानों, हथियारों, सैन्य उपकरणों और रसद सामग्री को कम समय में सीमा क्षेत्र तक पहुंचाना आसान होगा।
आपात परिस्थितियों में त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए रेल कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सीमावर्ती इलाकों में मजबूत परिवहन नेटवर्क से सुरक्षा बलों की operational preparedness बढ़ेगी और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आवागमन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
कुल मिलाकर, 2374 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली ये नई रेल लाइनें बीकानेर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विकास, सुरक्षा और आर्थिक संभावनाओं का नया मार्ग खोलेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ सरहदी इलाकों में आधारभूत ढांचे को भी मजबूत किया जा सकेगा।