



जयपुर। विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी एमएलए लेड में खर्च को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। विधायक निधि में भ्रष्टाचार से जुड़े खुलासे के बाद सरकार ने गाइडलाइन में 6 महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं। इन बदलावों के लागू होने के बाद विधायक बिना मांग के विकास कार्यों की अनुशंसा नहीं कर पाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत विधायक अपने अनुशंसा पत्र में कार्यकारी एजेंसी का नाम नहीं लिख सकेंगे। कार्यकारी एजेंसी तय करने का अधिकार कलेक्टर और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास रहेगा। इससे कार्यों की अनुशंसा और क्रियान्वयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
संशोधित गाइडलाइन के अनुसार विधायक की अनुशंसा के बाद संबंधित विभाग पहले यह जांच करेगा कि प्रस्तावित कार्य व्यवहारिक और फिजिबल है या नहीं। प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने से पहले यह भी देखा जाएगा कि जिस कार्य की अनुशंसा की गई है, वह किसी बजट घोषणा या सरकार की किसी अन्य योजना में पहले से शामिल तो नहीं है।
विधायक निधि का अधिकतर हिस्सा वास्तविक विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। सीधी खरीद को सीमित मात्रा में रखा जाएगा, ताकि अनावश्यक खरीद और संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही एक वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित 5 करोड़ रुपए की राशि उसी वर्ष में खर्च करनी होगी। बजट को आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाएगा।
अनुशंसा से लेकर कार्य पूर्ण होने तक की पूरी प्रक्रिया को विभाग की वेबसाइट पर लाइव अपडेट किया जाएगा। इससे आमजन भी यह देख सकेंगे कि किस विधायक ने कौन सा कार्य प्रस्तावित किया, उसकी स्थिति क्या है, किस एजेंसी को काम मिला और कार्य कब तक पूरा होगा। यह पूरा मामला विधायक निधि में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े खुलासे के बाद सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार एक डमी फर्म के प्रोपराइटर बनकर तीन विधायकों से 40 प्रतिशत कमीशन की कथित डील की गई थी। इस खुलासे में रेवंतराम डांगा, अनीता जाटव और ऋतु बनावत से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया था।
खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार ने 15 दिसंबर को संबंधित तीनों विधायकों की विधायक निधि सीज कर दी थी। साथ ही मामले की जांच के लिए मुख्य सतर्कता आयुक्त और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर सावंत की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। सावंत कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में विधायक निधि खर्च की गाइडलाइन में बदलाव करने की सिफारिश की थी। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर ग्रामीण विकास विभाग ने संशोधित गाइडलाइन का खाका तैयार किया है।
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि सावंत कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर विधायक निधि खर्च की गाइडलाइन में कई अहम और बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इन पर मंथन के लिए मंत्री के निर्देश पर विधानसभा अध्यक्ष की सलाह से विधायकों की कमेटी गठित की गई है।
उन्होंने कहा कि विधायकों की कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद संशोधित गाइडलाइन पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद विधायक निधि के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। कुल मिलाकर विधायक निधि खर्च को लेकर प्रस्तावित बदलावों को भ्रष्टाचार और मनमानी रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि ये संशोधन लागू होते हैं, तो विकास कार्यों की अनुशंसा से लेकर स्वीकृति और क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निगरानी योग्य हो जाएगी।