



जयपुर। यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान के लिए 29 जून का दिन महत्वपूर्ण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान सरकार और हरियाणा सरकार के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर होंगे। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहेंगे।
इस एमओए में यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच जल मात्रा, परियोजना की लागत, निर्माण, संचालन, रखरखाव और जल वितरण से जुड़ी अंतिम शर्तें निर्धारित की जाएंगी। माना जा रहा है कि यह समझौता शेखावाटी क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही पानी की मांग को धरातल पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को बाड़मेर में पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना को लेकर बड़ी घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक कार्यक्रम या घोषणा का इंतजार है।
राजस्थान को वर्ष 1994 के समझौते के तहत यमुना जल आवंटित हुआ था, लेकिन अब तक प्रदेश को उसका हिस्सा नहीं मिल पाया। अब 32 साल बाद राजस्थान को यमुना जल का हक मिलने की दिशा में ठोस प्रगति मानी जा रही है। इस पानी को पारंपरिक नहर की बजाय पाइपलाइन के माध्यम से शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचाने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस परियोजना को लागू करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। यमुना जल समझौते से शेखावाटी क्षेत्र के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों के कस्बों व गांवों को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलने का अनुमान है। इससे पेयजल संकट कम होने के साथ किसानों और आमजन को बड़ी राहत मिल सकती है।
प्रोजेक्ट की कुल लागत 33,379 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसमें से करीब 3,900 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति यानी जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे। परियोजना के तहत 3.6 मीटर व्यास की तीन पाइपलाइन डालने का प्रस्ताव है, जिनके माध्यम से पानी राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ यमुना जल परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की थी। बैठक में एमओए के सभी प्रमुख बिंदुओं को अंतिम रूप दिया गया। अब 29 जून को एमओए पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है।
इस परियोजना के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण और पाइपलाइन के रूट को लेकर है। जल लाने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे लगभग 302 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना है, लेकिन रेलवे ट्रैक के किनारे केवल 68 किलोमीटर लंबाई ही उपलब्ध बताई जा रही है।
इसके अलावा 95 किलोमीटर लूप लंबाई सहित लगभग 252 किलोमीटर के लिए नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और निजी भूमि की जरूरत होगी। ऐसे में भूमि अधिग्रहण, वित्तीय प्रबंधन, विभागीय अनुमतियां और तकनीकी समन्वय परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
एमओए में राजस्थान को मिलने वाले यमुना जल की मात्रा और पानी छोड़ने की अवधि तय की जाएगी। इसके साथ ही पाइपलाइन के सटीक रूट, परियोजना की कुल निर्माण लागत, दोनों राज्यों के बीच लागत बंटवारे, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया जाएगा।
हरियाणा, राजस्थान और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों की जवाबदेही और भूमिकाएं भी एमओए में तय होंगी। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समन्वय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यमुना जल प्रोजेक्ट को शेखावाटी क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माना जा रहा है। चूरू, सीकर और झुंझुनूं लंबे समय से पेयजल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं। यदि परियोजना समय पर पूरी होती है, तो इन जिलों के गांवों और कस्बों में जल आपूर्ति व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।