



मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में डीएमके को अगला राजनीतिक लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की रणनीति लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की है, ताकि परिसीमन, महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान किया जा सके।
बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन सहित कुछ अहम विधेयकों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू किया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी भी अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
सूत्रों के मुताबिक, यदि सरकार दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती है, तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाया जा सकता है। परिसीमन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 किए जाने की चर्चा है। इसके साथ ही महिला आरक्षण लागू करने और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे मुद्दों पर भी संवैधानिक स्तर पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

शिवसेना UBT के 9 में से 6 सांसदों के बगावत करने की चर्चा
शिवसेना UBT ने इसी बीच अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यह बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल कार्यालय में होगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना UBT के 9 में से 6 सांसदों के बगावत करने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक लोकसभा अध्यक्ष या कथित बागी गुट की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चर्चा में जिन सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, संजय दीना पाटिल ने बुधवार सुबह पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं।
संजय राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना UBT के 9 में से केवल 3 सांसद अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को स्वयं सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए। यदि यह टूट होती है, तो शिवसेना में चार साल के भीतर यह दूसरी बड़ी राजनीतिक टूट मानी जाएगी। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।