



जयपुर। पांचना बांध का पानी अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। बीते करीब 20 वर्षों से नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने, किसानों की लगातार बढ़ती नाराजगी और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं होने के आरोपों के बीच कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे स्वयं आंदोलनरत किसानों के समर्थन में मैदान में उतर सकते हैं।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में कहा है कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद पिछले दो दशकों से पांचना बांध की नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। इसके कारण कमांड क्षेत्र के हजारों किसान सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में जल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बांध के कैचमेंट क्षेत्र और कमांड एरिया के बीच पानी के वितरण को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर सवाई माधोपुर जिले की वजीरपुर तहसील के खंडीप गांव में किसानों और ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। आंदोलनकारी लगातार उनसे हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि सरकार ने समय रहते कोई सकारात्मक पहल नहीं की तो उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि दोनों पक्षों के बीच तत्काल संवाद स्थापित किया जाए तथा हाईकोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए नहरों में पानी छोड़ा जाए। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए किसानों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
डॉ. मीणा ने यह भी कहा कि वर्तमान में बांध क्षेत्र के आसपास के कुछ गांवों के लोग भी आंदोलन कर रहे हैं और वे पहले अपने गांवों के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने इन गांवों के लिए वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था विकसित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए वर्ष 2026-27 के बजट में सिंचाई सुविधाओं से वंचित गांवों के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
पांचना बांध का मुद्दा अब केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों, ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के बीच एक महत्वपूर्ण जन मुद्दे के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। ऐसे में सरकार के आगामी कदमों पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।