Tuesday, 16 June 2026

हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी पर हाईकोर्ट की रोक, फर्जी ट्रांजिट परमिट मामले में सरकार के पास ही रहेगा संरक्षण


हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी पर हाईकोर्ट की रोक, फर्जी ट्रांजिट परमिट मामले में सरकार के पास ही रहेगा संरक्षण

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जयपुर। असम से जयपुर लाए गए 16 वर्षीय हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा हाथी की कस्टडी महावत को सौंपने के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामले के अंतिम निर्णय तक हाथी सरकार के संरक्षण में ही रहेगा तथा उसकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और देखभाल में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को हाथी के खानपान, चिकित्सा सुविधा और समुचित रखरखाव का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

मामले की पृष्ठभूमि मार्च 2026 से जुड़ी हुई है, जब असम निवासी लोकनाथ बोहरा हाथी ‘मोहन’ को जयपुर लेकर आए थे। हाथी को जयपुर में सलीम खान के संरक्षण में रखा गया था। इसी दौरान वन विभाग को सूचना मिली कि हाथी को असम से राजस्थान लाने के लिए उपयोग किए गए ट्रांजिट दस्तावेज संदिग्ध हैं। जांच के बाद वन विभाग ने फर्जी ट्रांजिट परमिट के आरोप में कार्रवाई करते हुए हाथी को अपने कब्जे में ले लिया था।

इसके बाद सलीम खान ने दावा किया कि हाथी के वास्तविक मालिक ने उन्हें पावर ऑफ अटॉर्नी प्रदान की है, जिसके आधार पर उन्हें हाथी की अभिरक्षा दी जानी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मजिस्ट्रेट न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन अदालत ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए सलीम खान ने अपील दायर की।

अपीलीय अदालत एडीजे-7 ने 29 अप्रैल 2026 को सलीम खान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी उन्हें सौंपने का आदेश दिया था। इसी आदेश को राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का पक्ष था कि जब तक ट्रांजिट परमिट और हाथी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की वैधता की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक हाथी को निजी अभिरक्षा में देना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद सरकार की आपत्तियों को गंभीर मानते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत दस्तावेजों की वैधता, स्वामित्व संबंधी दावों और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। तब तक हाथी ‘मोहन’ राज्य सरकार की निगरानी में रहेगा।

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