Tuesday, 16 June 2026

आरएसएस के पंजीकरण विवाद पर बोले आरएसएस सर संघचालक मोहन भागवत, कहा- संघ के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं, खुलकर करता है काम


आरएसएस के पंजीकरण विवाद पर बोले आरएसएस  सर संघचालक मोहन भागवत, कहा- संघ के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं, खुलकर करता है काम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने केरल के त्रिशूर में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान संगठन के पंजीकरण को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है। संघ के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करता है।

आरएसएस  सर संघचालक मोहन भागवत से कर्नाटक सरकार द्वारा आरएसएस की गतिविधियों को गुप्त बताते हुए संगठन के पंजीकरण की आवश्यकता संबंधी टिप्पणी पर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई गुप्त संगठन नहीं है और न ही उसे किसी को जवाब देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं, सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और लोग अपने मोहल्लों में स्वयंसेवकों की गतिविधियां प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं।

आरएसएस  सर संघचालक भागवत ने कहा कि जिन संस्थाओं को सरकार से आर्थिक सहायता या अनुदान प्राप्त करना होता है, उनके लिए पंजीकरण आवश्यक होता है और ऐसा होना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को संघ के अस्तित्व और उसके कार्यों की पूरी जानकारी है तथा संगठन खुले तौर पर समाज के बीच कार्य करता है।

आरएसएस  सर संघचालक मोहन भागवत के बयान पर कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संस्था कानून और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस देश और विदेश से चंदा प्राप्त करता है तथा उसके पदाधिकारियों को सरकारी सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में संगठन को भी कानूनी प्रक्रियाओं और जवाबदेही का पालन करना चाहिए।

प्रियांक खड़गे ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर मोहन भागवत के बयान को उनके पत्र के जवाब के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उनके अनुसार उन्होंने 15 जून को आरएसएस के पंजीकरण और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर पत्र लिखा था, जबकि भागवत की टिप्पणी उससे पहले की है।

गौरतलब है कि आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रियांक खड़गे ने मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय तथा संपत्तियों के संबंध में जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया था कि जब गैर-सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, श्रमिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और कंपनियों को पंजीकरण एवं कानूनी नियमों का पालन करना पड़ता है, तो आरएसएस को इससे छूट क्यों दी जानी चाहिए।



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