



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाजपा पर प्रतिबंध संबंधी बयान को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने गहलोत के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण और विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।
जयपुर में भाजपा मुख्यालय पर मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस ने देश में हिंदू-मुस्लिम राजनीति की शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने केरल में मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक समझौता किया, जबकि मुस्लिम लीग का इतिहास देश के विभाजन से जुड़ा रहा है। तिवाड़ी ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती है और उसी सोच को आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को इतिहास से सीख लेनी चाहिए। तिवाड़ी ने कहा कि वर्ष 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया गया था और 1975 में आपातकाल लागू किया गया था, लेकिन दोनों ही फैसलों को बाद में वापस लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कदमों का राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को ही उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि भाजपा धर्म की राजनीति करती है और यदि आज इंदिरा गांधी जैसी नेता प्रधानमंत्री होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवाड़ी ने कांग्रेस पर निशाना साधा।
राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस उन्हें अपना प्रमुख नेता मानती है और उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार चुनावी पराजयों का सामना कर रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा चाहती है कि राहुल गांधी अपनी चुनावी हार का "शतक" पूरा करें।
तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस देश को बांटने की राजनीति करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र प्रथम और सबका साथ, सबका विकास की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सभी वर्गों तक बिना भेदभाव पहुंचाया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना, किसान सम्मान निधि और छात्रवृत्ति योजनाओं के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को भी इन योजनाओं का व्यापक लाभ मिला है।
राहुल गांधी के कोटा में प्रस्तावित छात्र संवाद कार्यक्रम और नीट परीक्षा विवाद पर भी तिवाड़ी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस मामले को विपक्ष "पेपर लीक" बता रहा है, वह पूरी परीक्षा का लीक होना नहीं था, बल्कि कुछ सवालों के कथित रूप से साझा होने का मामला था। उन्होंने इसे "पेपर कॉम्प्रोमाइज" की संज्ञा दी और कहा कि पूरे प्रश्नपत्र के लीक होने और कुछ प्रश्नों के बाहर आने में अंतर है।
गहलोत और तिवाड़ी के बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है, वहीं दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक और वैचारिक तर्कों के साथ आमने-सामने नजर आ रहे हैं।