



टोंक जिले में पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राजस्थान आदिवासी मीना सेवा संघ के नेतृत्व में सोमवार को बड़ी संख्या में समाजजन और किसान टोंक जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए तत्काल कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की।
संघ के जिलाध्यक्ष शिवजीलाल मीना के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि पांचना बांध और उससे जुड़े कमांड क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का समाधान अब और अधिक विलंबित नहीं किया जाना चाहिए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन सरकार के समय बंद की गई व्यवस्था आज तक प्रभावी रूप से बहाल नहीं की गई है, जिसके कारण हजारों किसान सिंचाई और पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कमांड क्षेत्र के किसानों द्वारा इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने 1 मई 2026 को राज्य सरकार को नहरों में पानी छोड़ने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उनका आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राजस्थान आदिवासी मीना सेवा संघ का कहना है कि कमांड क्षेत्र के सर्वसमाज के किसानों की प्रमुख मांग है कि न्यायालय के आदेशों की पालना करते हुए तुरंत नहरों में पानी छोड़ा जाए और किसानों को उनका वैधानिक अधिकार दिया जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पांचना बांध परियोजना के लिए क्षेत्र के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। ऐसे में विस्थापित किसानों और कमांड क्षेत्र के लोगों का पानी पर प्राथमिक अधिकार बनता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि किसानों के हितों की अनदेखी न करते हुए न्यायालय के आदेशों और विस्थापन संबंधी नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए।
संघ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों की अनदेखी जारी रही तो बीसलपुर बांध से जयपुर और अजमेर के लिए होने वाली जलापूर्ति के मुद्दे पर भी बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।
प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष शिवजीलाल मीना के अलावा सुखलाल मीना, पूर्व सरपंच महावीर मीना, कन्हैयालाल मीना, घनश्याम, रामलाल मीना, रामकरण मीना, तुलसीराम मीना, हनुमान, भरतलाल, कमलेश, बी.एल. मीना, मोतीलाल सहित बड़ी संख्या में किसान और समाजजन मौजूद रहे।